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Updated: 14 hours 15 min ago

इस साल विज्ञान की सबसे बड़ी खोज

Thu, 12/14/2017 - 13:14

आसमान में आग

अंतरिक्ष पर नज़र रखने वाले वैज्ञानिकों ने 15 फ़रवरी को एक छोटे से ग्रह को धरती के क़रीब आते देखा.

मगर इसके सुरक्षित गुज़रने के बाद दस हज़ार टन की एक अंतरिक्षीय चट्टान रूस के चेल्याविंस्क के ऊपर आसमान में जलकर राख हो गई. हालांकि उसके अवशेषों के ज़मीन पर गिरने से क़रीब एक हज़ार लोग घायल हो गए और आस-पास की कई इमारतों को नुकसान पहुंचा.

इस असाधारण घटना ने वैज्ञानिकों को क्षुद्र ग्रह के 'हमले' का अध्ययन करने का दुर्लभ संयोग दिया. इस जांच के लिए गाड़ियों के डैशबोर्ड पर लगे कैमरों को धन्यवाद देना चाहिए.

ये कैमरे रूसी चालकों ने बीमा कंपनियों और पुलिस का भ्रष्टाचार उजागर करने को लगाए थे. इस उल्कापिंड का एक बड़ा हिस्सा बाद में चेबराकुल झील की तली से बरामद किया गया.
तारों के प्रकार

मार्च में वैज्ञानिकों ने बताया कि अमरीकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा का अंतरिक्ष यान वॉयजर-1 अगस्त 2012 में हमारे सूर्य के बाहरी हिस्से हेलियोस्फ़ियर से बाहर चला गया है. मगर नासा के वैज्ञानिकों ने तुरंत ही इसका खंडन कर दिया.

सितंबर में यह दृष्टिकोण बदल गया और मिशन से जुड़े वैज्ञानिकों ने अपने प्रमाण दिए. इसमें कुछ अतिरिक्त आंकड़े भी शामिल थे. इसमें तारों के बीच के इलाक़े की जांच की पुष्टि की गई थी.

वॉयजर-1 को 1977 में बाहरी ग्रहों का अध्ययन करने के लिए छोड़ा गया था. तारों के बीच अंतरिक्ष में पहुँचने वाला यह पहला मानवनिर्मित यान था.
ख़तरनाक डाउनलोड

मई में बीबीसी न्यूज़ ने सबसे पहले ख़बर दी कि दुनिया की पहली थ्रीडी प्रिंटेड बंदूक़ से अमरीका में फ़ायर किया गया है. एक विवादास्पद समूह ने टेक्सस के ऑस्टिन के पास इस हथियार का परीक्षण किया.

ख़ुद को साइबर अराजकतावादी बताने वाले डिज़ायनर कोडी विल्सन ने कहा,''यह एक ऐसी दुनिया में झांकना है, जहाँ तकनीक कहती है कि आप वह सब कर सकते हैं, जो आप करना चाहते हैं.'

प्लास्टिक की इस बंदूक़ को बनाने के लिए प्रयोग में लाए गए ब्लूप्रिंट के ऑनलाइन होने के पहले हफ़्ते में ही उसे क़रीब एक लाख बार डाउनलोड किया गया. बंदूक़ का विरोध करने वाले कार्यकर्ताओं की आलोचना के बाद अमरीका ने इसे इंटरनेट से हटाने का निर्देश दिया.
आसमान की ओर देखो

इस साल सबूत मिला कि मौजूदा खगोल विज्ञान में एक नई शाखा को जन्म देने की क्षमता है. मई में बीबीसी न्यूज़ की वेबसाइट ने पहली बार दक्षिणी ध्रुव पर हुए आइस क्यूब परीक्षण की ख़बर दी थी. इसमें पहली बार अधिक ऊर्जा वाले न्यूट्रिनो को हमारे सौरमंडल से बाहर से आता दिखाया गया था.

जबकि खगोल विज्ञान की मौजूदा शाखाएं ऑप्टिकल या इंफ्रारेड जैसी, अलग-अलग प्रकार के प्रकाश का प्रयोग करती हैं. इस प्रयोग से कणों का उपयोग करते हुए ब्रह्मांड की तस्वीर बनाना संभव हो सका. इसके अलावा खगोलविदों के लिए खुशी की एक बात और थी कि उनके पास अब तक प्रकाश का सबसे पुराना नक्शा प्लैंक नाम की दूरबीन से लिए गए आंकड़ों के आधार पर बनाया गया था.
जलवायु संकट

सितंबर में संयुक्त राष्ट्र के एक दल ने जलवायु परिवर्तन के भौतिक प्रमाणों के साथ अपनी रिपोर्ट जारी की. जलवायु परिवर्तन पर अंतरसरकारी पैनल (आईपीसीसी) के साथ काम करने वाले वैज्ञानिकों ने कहा कि वे इसे लेकर 95 फ़ीसदी आश्वस्त हैं कि साल 1950 से ग्लोबल वार्मिंग के लिए इंसान प्रमुख रूप से ज़िम्मेदार है.

इस बात के और 2013 के सबसे अधिक गर्म साल रहने की आशंका जताने के बाद भी उत्सर्जन कम करने की प्रक्रिया को लेकर राजनीतिक दुविधा बनी हुई है.
नैनो ट्यूब से कंप्यूटर

स्टैनफ़ोर्ड विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों ने इस साल सितंबर में कार्बन के नैनोट्यूब से बना दुनिया का पहला कंप्यूटर पेश किया. इसे 'सेड्रिक' नाम दिया गया है. यह इस मशीन का बुनियादी प्रोटोटाइप है, पर इसे नए ज़माने के डिजिटल उपकरण के रूप में विकसित किया जा सकता है, जो आजकल के सिलिकॉन मॉडल की तुलना में छोटा, तेज़ और प्रभावशाली होगा.

इसके अलावा अमरीकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा और गूगल क्वांटम भौतिकी का उपयोग कर रफ़्तार बढ़ाने वाले डेढ़ करोड़ डॉलर के कंप्यूटर का प्रयोग करने पर सहमत हो गए. यह कंप्यूटर नासा में लगाया जाएगा. क्वांटम भौतिकी के क्षेत्र में काम करने वाले वैज्ञानिकों का ध्यान डी वेव मशीन ने अप्रैल में तब खींचा जब एक शोधपत्र में यह बताया गया कि यह क्वांटम स्तर पदार्थ के अजीब व्यवहार का पता लगाने में सक्षम है. हालांकि वास्तविक मशीन पर अभी असमंजस बरकरार है.
अतीत की तलाश

2013 में हुए परीक्षणों से पता चला कि आयरलैंड के लोइसी काउंटी में मिले जीवाश्म क़रीब चार हज़ार साल पुराने हैं और यह जीवाश्म सबसे पुराने कुत्ते के भी हो सकते हैं.

इस साल दुनिया ने इंसान के डीएनए के सबसे पुराने अनुक्रम के साथ-साथ निएंडरथल मानव के संपूर्ण जिनोम अनुक्रम को देखा. इन अध्ययनों ने मानव समूहों में अप्रत्याशित संबंधों का भी पता लगाया. इससे इंसान के प्रवासन की गुत्थी सुलझाने में भी मदद मिलेगी.
भविष्य का ईंधन

ब्रिटेन के चांसलर जॉर्ज ओसबॉर्न ने शेल गैस (एक तरह की प्राकृतिक गैस) के उत्खनन में लगी कंपनियों को समर्थन देने की प्रतिबद्धता जताई है. इसका ऊर्जा क्षेत्र में नाटकीय प्रभाव पड़ा है. अमरीका ने 2013 में पहली बार शेल गैस का निर्यात शुरू किया. ज़मीन में मौजूद हाइड्रोकार्बन निकालने के लिए विकसित की गई तकनीकी में से एक फ्रीकिंग है.

ऊर्जा विश्लेषक जर्मनी में अक्षय ऊर्जा के तेज़ी से हो रहे पारगमन पर नज़र रखे हैं. अधिक संभावनाओं के बाद भी यह सवाल है कि इसका पर्यटन और इस अक्षय ऊर्जा के भंडारण पर आने वाले ख़र्च को कौन वहन करेगा?

नाभिकीय ऊर्जा जैसी संभावना वाले ऊर्जा स्रोतों को लेकर भी कुछ संशय है. कैलिफ़ोर्निया के भौतिकविद ने अपने प्रयास से लेज़र संलयन करने में सफलता हासिल की है.
हानिकारक जंगल

पारिस्थितिकी तंत्र का अध्ययन करने वाले वैज्ञानिक इस बात पर नज़र रखे हैं कि यूरोप के जंगल किस तरह के संकट का सामना कर रहे हैं. इसमें ब्रिटेन में पेड़ों की पत्तियों या जड़ों का मरना भी शामिल है.

साल 2013 में यह पता चला कि एक महाद्वीप पर एक और ख़तरा आ गया है. विज्ञान पत्रिकाओं से पता चला कि जंगलों के इस विखंडन से वहाँ के प्राकृतिक आवास में रहने वाली प्रजातियों पर भी असर पड़ सकता है.
कैसे लुप्त हुआ जीवन?

पृथ्वी से जीवन लुप्त होने की छठवीं घटना को लक्ष्य कर शोधकर्ता ऐसी प्रजातियों की खोज में लगे हैं, जिनके बारे में विज्ञान को अब तक पता नहीं था. कोलंबिया और इक्वेडोर के घने जंगलों में मिलने वाले एक स्तनपायी ओलिंगिटो की खोज इस साल की बड़ी खोज थी.
माइंड मैपिंग

मार्च में अमरीका के नेतृत्व वाले एक दल ने इंसानी दिमाग़ की वायरिंग का पहला नक्शा जारी किया. द ह्यूमन कनेक्शन नाम की परियोजना इस पर प्रकाश डाल सकती हैं कि इंसान के दिमाग़ की संरचना किस तरह उसकी योग्यता और व्यवहार को प्रभावित कर सकती है.

Source: http://www.bbc.com/hindi/science/2013/12...

फेसबुक लाइव वीडियो एप अब उपलब्‍ध होगा सैमसंग स्‍मार्ट टीवी पर

Thu, 12/14/2017 - 12:43

स्‍टोरी - फेसबुक को हम सभी उसके ख़ास फीचर्स और यूजर फ्रैंडली नेचर की वजह से जानते हैं। कुछ समय पहले फेसबुक ने लाइव वीडियो फीचर को यूजर्स के लिए पेश किया था जिसके अंतर्गत आप लाइव दिखा सकते हैं कि अभी आप क्‍या कर रहे हैं। अभी तक यह फीचर, मात्र मोबाइल और डेस्‍कटॉप ऐप पर ही मौजूद था लेकिन अब लाइव वीडियो कॉल की सुविधा, स्‍मार्टटीवी पर भी आ गई है।

सैमसंग में हाल ही में एक ऐसी एेप्लिकेशन आई है जिसके तहत आप इसमें फेसबुक लाइव चैट भी कर सकते हैं। 

आपको बता दें कि इस ऐप को स्‍मार्टटीवी यूजर्स, आसानी से डाउनलोड कर सकते हैं। इस ऐप को 190 देशों में 35 विभिन्‍न भाषाओं के साथ डाउनलोड किया जा सकता है।

हालांकि सैमसंग टीवी के सभी मॉडल इस ऐप को सपोर्ट नहीं करते हैं लेकिन हाल ही में मार्केट में आने वाली टीवी में इस ऐप को डाउनलोड करने का ऑप्‍शन है। 2017 में लांच किए गए अब तक सभी मॉडल में इसकी सुविधा है। इस ऐप को सैमसंग स्‍मार्ट हब़ के द्वारा डाउनलोड किया जा सकता है। 

यह ऐप, यूजर के उसके फेसबुक पर लॉगिन होने की सुविधा प्रदान करती है और उसे भली-भांति ऑपरेट करने की सुविधा प्रदान करती है। अगर उसे कोई वीडियो सजेस्‍ट किया गया है तो उसे भी यूजर आसानी से इस ऐप के माध्‍यम से देख सकता है। इस ऐप को इंस्‍टॉल करने के बाद पहली बार लांचिंग करने के दौरान प्रमाणीकरण करना होता है। 

फेसबुक ने हाल ही में इस ऐप को लेकर कई अन्‍य सुधारों के बारे में घोषणा भी की है। इस ऐप के जरिए अगर आपका ऑडियो ऑन होगा तो आवाज अपने आप आने लगेगी। साथ ही वीडियो को मिनिमाइज़ रूप में भी देखा जा सकते हैं। आप चाहें तो उस दौरान न्‍यूज़ फीड पर भी स्‍क्रॉल कर सकते हैं। 

वहीं दूसरी ओर, मिड रोल व‍ीडियो एड भी पेश किए जाएंगे जो कि रेवन्‍यू जेनरेट करने में मदद करेंगे। फेसबुक, इसके अलावा अमेज़न फायर टीवी और एप्‍पल टीवी पर भी इसको लाने की योजना बना रहा है।

Source: hindi.gizbot.com

 

 

17 रुपए में महीनेभर का और 200 रुपए में सालभर का इंटरनेट

Thu, 12/14/2017 - 12:43

रिलायंस जियो और एयरटेल, वोडाफोन जैसी कंपनियों के होश उड़ाने आई है एक और कंपनी। कनाडा की मोबाइल फोन कंपनी डेटाविंड मात्र 17 रुपए प्रति महीने की दर से डाटा दे सकती है।

रिलायंस जियो की सेवा के लिए 1 अप्रैल से शुल्क देना होगा, जिसमें 99 रुपए में यूज़र्स को मेंबरशिप मिलती है। लेकिन 17 रुपए के इस ऑफर को अब कौन टक्कर दे सकता है। डेटाविंड केवल 200 रुपए में पूरे साल का इंटरनेट डाटा देने का प्लान कर रही है। जिसके लिए कंपनी अपने दूरसंचार सेवा के कारोबार में 100 करोड़ रुपए तक निवेश करने की योजना है।

कंपनी का कहना है जल्द ही उन्हें लाइसेंस मिल जाएगा, जिसके बाद वो प्रक्रिया आगे बड़ा सकते हैं। इसके तहत एक साल के इंटरनेट की कीमत 200 रुपए से अधिक नहीं होगी। यदि ऐसा हुआ तो यूज़र्स के लिए यह सबसे बड़ी खुशखबरी होगी।

Source: hindi.gizbot.com

 

 

बिना स्मार्टफोन के होगी कैशलेस पेमेंट

Thu, 12/14/2017 - 12:43

आईडीबीआई बैंक ने देश में एक शानदार सुविधा की शुरुआत की है, इससे अब आधार के जरिए भुगतान हो पाएगा। यह सब मुमकिन होगा आईडीबीआई बैंक की लॉन्च की गई देश की पहली आधार एप के जरिए। आईडीबीआई बैंक की यह नई एप उन लोगों को भी सक्षम बनाएगी जिनके पास स्मार्टफोन नहीं है। इस एप के जरिए बिना स्मार्टफोन के भी भुगतान किया जा सकेगा।

बता दें कि इससे पहले केंद्र सरकार ने सभी बैंकों से कहा था कि वित्तीय लेन-देन के लिए फिंगरप्रिंट्स वाले आधार एप को इस महीने के अंत तक लॉन्च करें। इसके साथ ही सभी बैंकों से यह भी कहा गया है कि वे भीम एप में 'पे टू आधार' फीचर को 31 मार्च से पहले जोड़ लें।

आइए जानते हैं आधार पे एप की 5 खास बातें-

क्रेडिट कार्ड और डेबिट कार्ड के शुल्क से मुक्ति 
आधार पे ऐप से होने वाले लेन-देन से बैंकों द्वारा लिए जाने वाले क्रेडिट कार्ड या डेबिट कार्ड के शुल्क से मुक्ति मिलेगी। आधार पे स्मार्टफोन पेमेंट ऐप का सबसे बड़ा फायदा यह है कि अब व्यापारियों और दुकानदारों को इसके लिए एमडीआर (मर्चेंट डिस्काउंट रेट) नहीं देना होगा। एमडीआर बैंकों द्वारा लिया जाने वाला वह चार्ज होता है, जो बैंक द्वारा व्यापारियों से क्रेडिट या डेबिट कार्ड से होने वाले ट्रांजैक्शन के बदले लिया जाता है।

बिना स्मार्टफोन कैशलेस ट्रांजैक्शन
इस ऐप से ग्राहक अब स्मार्टफोन के बिना कैशलेस ट्रांजैक्शन कर सकेंगे। इसके लिए ग्राहक के पास मोबाइल फोन होना भी जरूरी नहीं है। हालंकि व्यापारी और दुकानदार के पास स्मार्टफोन और यह एप डाउनलोड होना चाहिए।

सिर्फ एंड्रायड पर है एप
यह एप फिलहाल केवल एंड्रायड प्लेटफ़ॉर्म पर उपलब्ध है। मर्चंट्स इस एप को गूगल प्ले स्टोर से डाउनलोड कर सकते हैं।

इंटरनेट का होना जरुरी है 
इस एप के लिए भले ही ग्राहकों के पास स्मार्टफोन का होना जरुरी नहीं है, लेकिन इसके जरिए भुगतान के लिए इंटरनेट होना जरुरी है। इसी के जरिए ग्राहक का बायोमीट्रिक वेरिफिकेशन होगा।

फ़ास्ट्रैक रिफ्लेक्स एक्टिविटी ट्रैकर लॉन्च, 7 दिनों का बैटरी बैकअप

Thu, 12/14/2017 - 12:42

फ़ास्ट्रैक ने अपना नया एक्टिविटी ट्रैकर लॉन्च कर दिया है, इसकी कीमत 1,995 रुपए है। फ़ास्ट्रैक रिफ्लेक्स आपकी एक्टिविटी और स्लीप डाटा को ट्रैक करता है। फ़ास्ट्रैक का यह नया ट्रैकर आपको कई रंग वैरिएंट में मिल जाएगा। यह वैरिएंट दो रगों में आता है, इस बैंड का बाहर और अंदर का रंग अलग है। दिखने में यह बंद काफी स्मार्ट है और खास यूथ के लिए डिज़ाइन किया गया है।

फ़ास्ट्रैक रिफ्लेक्स एंड्रायड और iOS के दोनों के साथ कम्पेटिबल है। यह आपके फोन कॉल और टेक्स्ट मैसेज आदि के नोटीफिकेशन भी दिखता है। इस बैंड में वाइब्रेशन अलार्म सपोर्ट भी है। इसकी ट्रैकर की एक और खासियत है, यदि आप थोड़े अधिक समय के लिए इनएक्टिव हैं तो यह आपको याद दिलाएगा कि आपको अब वॉक करना चाहिए।

इस शानदार ट्रैकर को यूएसबी एडाप्टर या यूएसबी पोर्ट के जरिए चार्ज किया जा सकता है।

Source: hindi.gizbot.com

 

 

कैसे इस्तेमाल करें आधार पेमेंट एप, क्या है इसका फायदा?

Thu, 12/14/2017 - 12:42

पिछले कुछ समय से सरकार देश में डिजिटल पेमेंट को बढ़ावा देने पर जोर दे रही है। इसके लिए सरकार ने कई नई सेवाएं भी शुरू की हैं साथ ही भीम एप जैसी भी सुविधा उपलब्ध कराई है। डिजिटल पेमेंट को और बढ़ावा देने के लिए IDFC Bank भी एक नई और आसान सेवा के साथ आया है। जिसमें स्मार्टफोन नहीं बल्कि आधार से हो पाएगी पेमेंट।

आधार पे के जरिए अब व्यापारी ग्राहक के आधार नंबर और उसके साथ दर्ज हुए बायोमीट्रिक आंकड़े की मदद से भुगतान ले पाएंगे। इसके लिए ग्राहक को स्मार्टफोन या एप या फिर इंटरनेट की आवश्यता नहीं है। हालाँकि मर्चेंट के पास इस एप और इंटरनेट का होना जरुरी है।

चलिए देखते हैं कि यह एप कैसे काम करती है और इसका क्या लाभ होगा।

  • इसके लिए मर्चेंट्स के पास यह एप होना जरुरी है, इस एप को एंड्रायड यूज़र्स गूगल प्ले स्टोर से डाउनलोड कर सकते हैं।
  • मर्चेंट्स को फोन के साथ एक बायोमीट्रिक स्कैनर जोड़ना होगा और उसे इस एप के साथ लिंक करना होगा।
  • जब ग्राहक पेमेंट करेंगे तो वो इस एप पर अपना आधार नंबर डालेंगे, और उस बैंक खाते को चुनेंगे जिससे वह पेमेंट करना चाहते हैं।
  • यह सब करने के बाद बायोमीट्रिक मशीन से ग्राहक के फिंगरप्रिंट व अन्य जानकारी वेरीफाई की जाएगी और आसानी से भुगतान हो पाएगा।

Source: hindi.gizbot.com

 

 

ब्रेस्ट साइज़ कैसे करे कम| घरेलू नुस्खे|

Thu, 12/14/2017 - 06:00

आजकल जमाना बहुत तेज़ी से बदल रहा है और खास कर नवयुवक और नव युवतियाँ अपने लुक्स और बाहरी सुन्दरता को लेकर बहुत ही जागरूक हो गये हैं| हर कोई पर्फेक्ट दिखना चाहता है और हर कोई चाहता है की उसके बॉडी एक दम फिट, फाइन और healthy दिखे| लेकिन जीवन में कुछ ऐसे बदलाव भी आते हैं जिनके कारण हमारी बॉडी चेंज हो जाती है जैसे उम्र के साथ हॉर्मोन्स में बदलाव, हमारे खाने पीने में बदलाव, और ऐसे दूसरे कारक जो की हमारे शरीर के लुक को बदल देते हैं और ऐसी एक समस्या है ब्रेस्ट (स्तन) के साइज़ का बड़ा होना| जहाँ एक और लड़कियाँ अपने स्तनों छोटे आकर को लेकर परेशन हैं वही दूसरी और ऐसी बहुत ही लडकियाँ और महिलायें हैं जोकि अपने वक्ष का साइज़ को घटाने के तरीके खोज रही हैं|

*आप यहाँ जानेंगे की ब्रेस्ट यानि स्तन का आकार (size) कैसे कम करें आसन हिंदी में|

बड़े ब्रेस्ट होने से अक्सर लड़कियों को सोशियल और मेंटल प्रॉब्लम्स झेलनी पड़ती है जैसे दूसरों के सामने शर्म आना, बड़े स्तन के कारण मानसिक तनाव रहना| इसके साथ कई युवतियों में कॉन्फिडेन्स की कमी भी होना एक आम बात है| स्तनों के आकर का ज्यादा बड़ा होना कभी कभी आपकी सुन्दरता और आकर्षण को तो प्रभावित करता ही है साथ ही आपके पोस्चर पर भी नेगेटिव effect डालता है| कई महिलाओं में स्तन के नीचे रॅशस, गर्दन में दर्द रहना (neck pain), साँस लेने में परेशानी (difficult breathing), सोने में परेशानी, कमर दर्द, कन्धों में दर्द रहना आदि समस्याएँ होने के पीछे भी स्तनों का आकर बड़ा होना जिम्मेदार होता है|

Breast size bada hone ke Karan | Causes Responsible for big breast

देखिए, ब्रेस्ट 20 साल की उमर तक भड़ते हैं जो की नॉर्मल बात है और उनकी growth अगर नॉर्मल हो तो वो आपके स्तन का आकर भि normal होगा लेकिन अगर उनकी ग्रोत तेज़ी से होगी तो आकर बड़ा होने लगेगा| लेकिन कुछ ऐसे कारण भी हैं जो स्तनों की वृद्धि को अनियंत्रित रूप से बढ़ाने के लिए जिम्मेदार मने जाते हैं जैसे:

 

हॉर्मोनल बदलाव  

स्तन का साइज़ बढ़ने के लिए estrogen  नामक हॉर्मोन ज़िमेदार होता है| इसलिए यदि शरीरमें इसका स्तर normal से अधिक हो तो आपके ब्रेस्ट का साइज़ भी बड़ा हो जाएगा|

प्रेग्नेन्सी और उसके बाद

प्रेग्नेन्सी और स्तनपान के दौरान हॉर्मोन्स के levels में काफ़ी उतार चड़ाव आते हैं और इन बदलावों के कारण आपके वक्ष का साइज़ भी बढ़ जाता है| लेकिन आम तौर पर कुछ महिलाओ में स्तनपान छुडवाने के बाद उनका साइज़ नॉर्मल भी हो जाता है|

वजन का बढ़ना 

ऐसे कई कारण जैसे हॉर्मोन्स, खान पान, लाइफस्टाइल, दवाइयों आदि के प्रभाव से आपका वजन तेज़ी से बढ़ता है फलसवरूप आपके वक्ष का साइज़ भी बढ़ जाता है|

आनुवांशिक गुण (हेरिडिटी)

माता पिता और फॅमिली हिस्टरी का प्रभाव भी  स्तन के आकर के लिए जिम्मेदार होता है|

आपकी बॉडी टाइप

अक्सर छोटी दिखने वाली लड़कियों में मोटापे के कारण उनके वक्ष में ज्यादा fat इकठ्ठा होने के कारण भी ऐसा होता है|

मेडिकेशन

कॅन्सर मेडिकेशन, स्टेराइड्स युक्त दवाइयां और दूसरी वेट बढ़ाने वाली मेडिसिन के प्रभाव के कारण भी साइज़ बढ़ना एक कामन प्राब्लम है|

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अब याहू का नाम हो जाएगा 'अल्ताबा'!

Wed, 12/13/2017 - 10:12

याहू दुनिया के सबसे पॉपुलर सर्च इंजन में से एक है। गूगल के बाद याहू का ही नाम लिया जाता है। लेकिन कुछ समय से घाटे में चल रही इस कंपनी में काफी कुछ बदलने वाला है। जिसमें सबसे पहले आता है इसका नाम, अब आपका प्यारा याहू जल्द ही याहू से बदलकर अल्ताबा होने जा रहा है।

 

 

 

 

याहू कुछ समय से घाटे में है, जिसके चलते कंपनी अपनी डिजिटल सेवाओं को वेराइजन कम्युनिकेशन को बेचने जा रही है। जिसमें ईमेल, वेबसाइट, मोबाइल ईपीएस और एडवरटाइजिंग टूल्स आदि शामिल होंगे।

 

 

 

याहू के 10 मेम्बर वाले बोर्ड में सीईओ मेरिसा मेयर को मिलाकर चार डायरेक्टर हैं। यदि वेराइजन डील होती है, तो यह सभी इस्तीफ़ा दे देंगे।

   

एंड्रायड और आईओएस डिवाइस पर कैसे सेट करें व्‍हाट्सएप रिंगटोन

Wed, 12/13/2017 - 10:11

व्‍हाट्सएप ने जब से कॉल फीचर को लांच किया है लोगों के बीच आपसी बातचीत का ये सबसे अच्‍छा जरिया बन चुका है। ऐसे में अब लोग अपने स्‍मार्टफोन में व्‍हाट्सएप की रिंगटोन को सेट करने में लगे हुए है।

अगर आपके एंड्रायड या आईओएस डिवाइस है तो हम आपको बताएंगे कि आप किस प्रकार व्‍हाट्सएप की रिंगटोन को सेट कर सकते हैं। आगे पढें:

आईओएस स्‍मार्टफोन में व्‍हाट्सएप की रिंगटोन

अगर आप आईओएस डिवाइस में अपनी रिंगटोन को बदलना चाहते हैं तो आपको व्‍हाट्सएप की सेटिंग में नोटिफिकेशन में जाना होगा। यहां से आप कई रिंगटोन को सेलेक्‍ट करके अपने हिसाब से सेट कर सकते हैं। इसके लिए आप इन स्‍टेप को फॉलो कर सकते हैं: 

1. आईफोन कॉन्‍टेक्‍ट एप में जाएं। 

2. जिस कॉन्‍टेक्‍ट के लिए कस्‍टम रिंगटोन सेलेक्‍ट करना चाहते हैं उसे सेलेक्‍ट कर दें। 

3. अब स्‍क्रीन पर राइट कॉर्नर पर एडिट पर टैप करें। 

4. रिंगटोन का चयन करें। 

5. अपने आईफोन को रिस्‍टार्ट करें। 

नोट: मैसेज के लिए भी नोटिफिकेशन साउंड को कस्‍टमाइज किया जाता है इसके लिए आपको व्‍हाट्सएप की सेटिंग में जाकर नोटिफिकेशन पर क्लिक करना होगा। 

एंड्रायड डिवाइस में रिंगटोन सेटिंग के लिए

एंड्रायड डिवाइस में रिंगटोन सेटिंग के लिए इस प्रक्रिया को फॉलो करें। 

1. व्‍हाट्सएप पर जाएं। उसकी सेटिंग को सेलेक्‍ट करें। 

2. सेटिंग में नोटिफिकेशन पर जाएं। 

3. इसमें नोटिफिकेशन टोन पर जाएं और आपके सामने कई सारी रिंगटोन ओपन हो जाएगी। 

4. अब आप इनमें से अपनी मनचाही रिंगटोन को सेट कर सकते हैं। 

आपको बता दें, एंड्रायड के अलावा आईओएस यूजर्स भी इस तरह रिंगटोन को सेट कर सकते हैं। 

स्तन घटाने के उपाय, तरीके और टिप्स

Wed, 12/13/2017 - 05:00

वैसे तो ब्रेस्ट साइज़ कम करने या घटाने के लिए मार्केट में बहुत सारी क्रीम्स, आयल, दवाई (मेडिसिन) और दूसरे ट्रीट्मेंट्स उपलब्ध हैं| लेकिन आप जानते हैं की इन सबके कुछ side effects भी होते हैं  और ज्यादातर ऐसे ट्रीट्मेंट्स फैल भी हो जाते हैं| सर्जरी की बात करें तो सर्जरी के बाद के निशान और इस प्रक्रिया के दौरान जटिलताएं होने की बहुत अधिक संभावना होती है| इसलिए सही यही होगा की आप नॅचुरल तरीके जैसे घरेलू नुस्खे, डाइट, exercises, लाइफस्टाइल में उचित बदलाव करके ही अपने ब्रेस्ट  का साइज़ कम करने के बारे में सोचे| ये 100 पर्सेंट side effects फ्री हैं और इनका रिज़ल्ट भी एक दम सटीक होगा|

यहा कुछ टिप्स, उपाय और home remedies  दी जा रही हैं जिन्हे पढ़कर आप तेज़ी से अपने ब्रेस्ट का साइज़ घटा सकती हैं साथ ही ढीले ढाले स्तनों को टाइट कर उन्हें सुडोल बना सकती हैं|

ग्रीन टी खूब पियो

ये तो आज साइन्स भी मान चुकी है की रेग्युलर टी की जगह ग्रीन टी पीने से बॉडी को बहुत सारे एंटीऑक्सीडेंट और पोषक तत्व मिलते हैं जो की बॉडी को फिट, सेहतमंद और जवान रखने में मदद्गार होते हैं| अक्सर इस चाय को वो लोग ज्यादा पीते हैं जिन्हे अपना वजन कम करना हो| इस चाय में catechins पाए जाते हैं जो की बॉडी में fat को बर्न करते हैं मतलब ये आपके ब्रेस्ट में जमा वसा यानि fat को भी कम करने में मदद करते हैं जिसके फलसवरूप आपको मिलता है सुडोल वक्ष| साथ ही इस चाय में पाए जाने वाले anti cancerous गुण महिलाओं में होने वाले ब्रेस्ट कॅन्सर से भी बचाते हैं|

बस आपके करना यह है की एक चम्मच ग्रीन टी पाउडर/लीव्स या फिर 1-2 teabags एक कप उबलते पानी में डालनी है| कप को कुछ देर ढक दें ताकि ग्रीन टी से सभी गुण उस लिक्विड में आ जायें| अब छान कर उस चाय को पीजिए| ऐसे दिन में 3-4 बार करने से अच्छा लाभ मिलेगा| अधिक लाभ पाने के लिए चाय बनाने के बाद उस कप में एक निम्बू का रस घोल कर पीयें|

अदरक करे fat burn

 

अदरक का आयुर्वेदिक मेडिसिन में बहुत बड़ा योगदान है क्योंकि यह खाँसी से लेकर कॅन्सर तक के इलाज में प्रयोग होती है| इस अदरक में ऐसे गुण होते हैं जो की आपकी मेटबॉलिज़म को तेज करते हैं| अच्छी मेटबॉलिज़म होने से ना सिर्फ़ आपका पाचन अच्छा होता है बल्कि शरीर में मौजूद fat cells सेल्स भी बर्न होने लगते हैं और इसके फलसवरूप आपको मिलता है पर्फेक्ट सुडोल सीना और आकर्षक शरीर|

इसे ब्रेस्ट कम करने के लिए उपयोग करने की विधि ये है की आप एक बड़े चम्मच अदरक पाउडर को 11/2 कप पानी के साथ 5 मिनिट्स तक हल्की आंच पर उबालें| इस चाय को छान कर इसमे तोड़ा सा शहद (हनी) मिलकर पी लीजिए| ये चाय आपको दिन में 2 बार पीनी है|

अलसी के बीज /तेल भी है बहुत असरदार

अलसी को इंग्लीश में flax seeds कहते हैं| इसके बीज में ओमेगा-3-फॅटी एसिड्स परचूर मात्रा में पाए जाते हैं| ये फॅटी एसिड्स बॉडी में estrogen के लेवल को कम करते हैं और आप ये जानते ही हैं की इस हॉर्मोन की अधिकता से वक्ष का आकर बढ़ता है| साथ ही अलसी के बीज का नियमित सेवन आपके शरीर को अंदर से सॉफ रखने में मदद करता है|

आप अलसी बीज पाउडर के एक स्पून को एक गिलास पानी में घोल कर पी सकते हैं| दूसरा तरीका ये है की आप एक स्पून अलसी का तेल दिन में एक बार पी सकते हैं|

फिश आयल कॅप्सुल्स

फिश आयल कॅप्सुल्स में भरपूर मात्रा में ओमेगा-3 फॅटी एसिड्स पाए जाते हैं| जिसके बारे में अभी ऊपर ही आपने पढ़ा है| आप फिश आयल कॅप्सुल्स के सही dose के लिए अपने डॉक्टर से कन्सल्ट कर सकते हैं| इसके अलावा आप ये फॅटी एसिड्स दूसरी स्त्रोत जैसे साल्मन, ट्यूना, सोयाबीन, अखरोट आदि खा कर भी प्राप्त कर सकते हैं| ये फॅटी आसिड्स ना केवल आपके estrogen को कम करेंगे बल्कि आपकी स्किन और सेहत दोनों ही healthy रहेंगी साथ ही आपका वेट भी कम होने लगेगा|

अंडे का सफ़ेद भाग

एग यानी अंडे का पीला भाग हटा दीजिए और केवल वाइट लिक्विड एक कटोरी में निकल लीजिए| इस वाइट पार्ट को कुछ देर फ़ैंटिए जिससे आपको एक सफेद झाग जैसा पेस्ट मिलेगा| इस पेस्ट को अपने स्तनों के नीचले भाग पर लगा लीजिए और सूखने के बाद एक प्याज़ का रस एक गिलास पानी में मिलाकर अपने स्तनों को धोने के लिए प्रयोग करें| ऐसा हर रोज एक बार दो हफ्तों के लिए कीजिए| अंडे के स्किन टाइटनिंग और टोनिंग गुण आपके स्तानो में टाइटनेस लाएगा जिससे वो छोटे लगने लगेगे|

हल्दी और नीम

हल्दी(turmeric) और नीम के आयुर्वेदिक गुणों को तो हम सब जानते हैं| इन दोनो नॅचुरल पदार्थो में कमाल के inflammation घटाने वाले गुण होते हैं|  अक्सर प्रेग्नेन्सी और स्तनपान के बाद inflammation बढ़ जाता है| तो आप हल्दी और नीम का उपयोग करके इनफ्लमेशन को कम करके अपने ब्रेस्ट कुदरती तरीके से घटा सकते हैं| नीमके एक मुट्ठी पत्तों को 2 गिलास पानी के साथ बाय्ल करें| 10 मिनिट्स बाद सल्यूशन को छान कर इसमें एक टीसपून हल्दी पाउडर और तोड़ा सा स्वादानुसार हनी मिला लें| इस लिक्विड को रोजाना पीने से आपके वक्ष का साइज़ कम होने लगेगा|

मसाज थेरेपी

जब बात ब्रेस्ट साइज़ कम करने की है तो हर कोई मसाज करने की सलाह देता है| मसाज से ना केवल आपका खून का दौरा अच्छा होता है बल्कि ये आपके शरीर के किसी हिस्से से fat कम करने में भी बहुत कारगर (effective) होती है| इसलिए ये मसाज ट्रीट्मेंट्स हमारी दादी नानी के समय से पहले के जमाने से ही चला आ रहा है.|आपको बस ये करना है की हल्का गर्म ऑलिव आयल या कोकनट आयल लेकर अपने स्तानो पर लगाना है और फिर अंगूठे के साथ की उंगली और बीच की अंगुली के प्रयोग से नीचे से ऊपर की और गोल-गोल मसाज करनी है| ऐसा 10 मिनिट्स के लिए करना है और दिन में दो बार यानी मॉर्निंग और नाइट में कुछ हफ़्तों के लिए करने से आपकी प्राब्लम दूर हो ज़ायगी और आपको मिलेंगे तने हुए आकर्षक ब्रेस्ट्स| आप मसाज के लिए किसी अच्छी स्तन घटाने वाली क्रीम या लोशन का भी प्रयोग कर सकती हैं| इनके बारे में आप अपने डॉक्टर की राय ले सकती हैं|

मेथी के दाने (fenugreek seeds)

मेथी के दानों में कुछ ऐसे गुण होते हैं जो की आपके ब्रेस्ट का साइज़ reduce करने में आपकी हेल्प कर सकते हैं| मेथी सीड्स का उपयोग करके आपको एक अच्छा ब्रेस्ट रिडक्शन मास्क बनाना है| और ऐसा करने के लिए तीन बड़े चम्मच मेथी के सीड्स को पूरी रात पानी में डुबो के रखिए| सुबे इनकी पेस्ट बनाकर अपने स्तानो पर मास्क कि तरह से लगा लीजिए| अब 10 से 15 मिनिट्स बाद आप इसे सॉफ कर सकते हैं|  ऐसा हफ्ते में दो या तीन बार करने से कुछ हफ़्तों में आपके स्तन छोटे होने लगेगे और उनमें टाइटनेस भी आएगी|

कुछ दूसरे घरेलू नुस्खे

  1. Manjistha  के प्रयोग से आप अपने ब्रेस्ट के साइज़ को घटा सकते हैं| ये आपके खून को भी सॉफ करने में असरदार है|
  2. गुआरना जो की एक हर्ब है जिसे अक्सर ब्रेस्ट को कम करने वाली दवा बनाने में use किया जाता है| इस हर्ब के नियमित उपयोग से बहुत फ़ायदा होता है|
  3. Hoelen एक फंगस है| इसका उपयोग भी स्तन छोटे करने वाली पिल्स बनाने में किया जाता है|
  4.  
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आधार कार्ड का फायदा

Wed, 12/13/2017 - 04:12

आधार कार्ड का फायदा.....
ध्यान रखें व ज्यादा से ज्यादा शेयर करें .....यदि कोई खोया या मां बाप से बिछड़ा बच्चा आपको मीले तो उसे आधार कार्ड सेन्टर ले जाएं..... यदी उसका आधार कार्ड बना हुआ होगा तो आधार कार्ड सेन्सर पर हथेली या अंगूठा रखते ही उस बच्चे की  पुरी जानकारी आधार स्करीन पर आ जायेगी........ कृपया इसलिए हर बच्चे का आधार कार्ड जरुर बनवाएं । 
Good information for all kindly share..

ब्रेस्ट कम करने के लिए क्या खाएं

Tue, 12/12/2017 - 06:00

एक अच्छा डाइट प्लान बनाना ना केवल आपकी सेहत के लिए अच्छा है बल्कि आपकी फिज़िकल appearance के लिए भी  बहुत लाभदायक है| यहाँ आप ऐसे फूड्स के बारे में जानेगे जिन्हे खा कर आप अपने स्तनों का साइज़ और अपनी कमर का साइज़ मतलब वेट भी कम कर सकते हैं| तो नीचे दिए गये डाइट टिप्स को अपने डाइट प्लान में आज से ही शामिल करने का सोचिए|

  • पहले तो आप पानी का खूब प्रयोग कीजिए| क्योंकि पानी पीने से आपका मेटाबोलिज्म तो तेज होता ही है साथ ही ये आपकी भूख को कंट्रोल करके वेट मॅनेज्मेंट में भी मदद करता है और वेट कम होने से आपकी चेस्ट का साइज़ भी घटता है|
  • विटामिन सी युक्त फ्रूट्स और वेजिटेबल जैसे संतरा, मौसम्बी, नींबू, माल्टा, स्ट्रॉबेरी, टमाटर, फालसा आदि का रोजाना  सेवन  करके आप अपने वक्ष स्थल को छोटा कर सकते हैं| सुबह उठते ही एक या दो नींबू हल्के गरम पानी में डालकर पीने से भी आपका ब्रेस्ट साइज़ तेज़ी से घटता है साथ में वेट भी कम होने लगता है|
  • ओमेगा-3 फॅटी एसिड्स  से भरपूर फूड्स जैसे फिश, अखरोट, सोयाबीन, अलसी आदि का खूब सेवन करें| इसके बारे में आपको ऊपर भी बताया गया है.
  • लो कॅलरी फ्रूट्स और वेजिटेबल्स जैसे ब्राकोली, पत्ता गोभी, जिमिकन्द, पालक, सरसों आदि को भी अपने डाइट प्लान में शामिल करें|
  • सूखे मेवे जैसे अखरोट, बादाम, पिसता, किशमिश आदि आपके मेटबॉलिज़म को बढ़ाते हैं और इसके फलसवरूप आपका वेट मेनटेन रहता है|
  • हाइ शुगर, सॉल्टी, फ्राइड, फास्ट फूड्स का सेवन बंद करें ये मोटापा जल्दी बढ़ाते हैं और इसका परिणाम आपको पता ही है|
  • alcohol  का सेवन कभी मत कीजिए|
  • प्रोटीन युक्त फूड्स को अपने डाइयेट menu में आज से ही शामिल कर लीजिए| कुछ अच्छे उदहारण  हैं अंडा,सोयाबीन, दूध, दही, चिकन आदि|
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संगीत सुनें और पाएं इन सात समस्याओं से छुटकारा

Mon, 12/11/2017 - 10:31

कोई संगीत इसलिए सुनता है कि उसे संगीत का शौक है, तो कोई अपनी दिन भर की थकान संगीत से मिटाता है। वजह कुछ भी हो लेकिन हर किसी के जीवन से कहीं न कहीं जुड़ा है।

अगर आप भी रोज संगीत सुनकर खुदको तरोताजा करते हैं तो जा‌न लें कि यह न सिर्फ आपके मूड को बेहतर बनाता है बल्कि सेहत से जुड़ी कई समस्याओं को सुलझाने में मदद करता है।

1. नवजात बच्चों का बढ़ेगा वजन
कई बार समय से पहले डिलिवरी या कमजोर शिशु के जन्म के बाद उसे लंबे समय तक डॉक्टर निरीक्षण में रखते हैं। एक कै‌नेडियन शोध के मुताबिक, समय से पहले हुए नवजात शिशुओं के कक्ष में हल्का संगीत चलाने से न सिर्फ उन्हें दर्द का एहसास कम होता है बल्कि उनका वजन भी तेजी से बढ़ता है।

2. ब्रेन डैमेज से बचाता है
अमेरिकी शोध के अनुसार, संगीत सुनने से मस्तिष्क रोगों से दूर रहता है। खासतौर पर ऑटिस्टिक बच्चों को बोलने में संगीत से बहुत मदद मिलती है। संगीत का संबंध पार्किन्सन के रोगियों के उपचार से भी है।

शोधकर्ता माइकल डी जॉर्जिया के अनुसार, 'हम अपने शोध में संगीत की शक्ति पर और अध्ययन कर रहे हैं और इसके मस्तिष्क से संबंध को समझ रहे हैं। ‌हालांकि हम अभी तक इसकी सीमाओं का पता नहीं लगा सके हैं।'

3. सुनने की शक्ति बढ़ाता है
संगीत सुनने से भले ही किसी का बहरापन ठीक न हो लेकिन यह भी सच है कि इसके उपचार में संगीत का बहुत महत्व है।

वॉशिंगटन पोस्ट में छपे एक शोध के मुताबिक, एक 70 वर्षीय संगीतकार भी 50 वर्षीय सामान्य व्यक्ति की अपेक्षा भीड़भाड़ में भी आवाज सही तरह से सुन सकता है।

4. टूटे हुए दिल के लिए
प्यार में दिल टूटा हो या किसी और घटना से गहरा सदमा पहुंचा हो, संगीत सुनने से उबरने में बहुत मदद मिलती है। कई शोधों में यह साबित हो चुका है कि संगीत सुनने से ब्लड प्रेशर सामान्य होता है जिससे दिल के दौरे का खतरा कम होता है, शरीर का रक्त संचार बढ़ता है और मूड बेहतर हो जाता है।

कई शोधों में हार्ट अटैक के दौरान सर्जरी करते वक्त हल्के संगीत को फायदेमंद माना गया है।

5. खेल में अच्छी परफॉर्मेंस के लिए
ब्रिटेन में 2005 में हुए एक शोध में पाया गया कि खेलने या शारीरिक व्यायाम के दौरान संगीत सुनने से क्षमता और भी बढ़ जाती है और व्यक्त‌ि अच्छा परफॉर्म करता है।

6. सकारात्मक रवैया
2008 के शोध के अनुसार, संगीत सुनने से किशोरों का व्यवहार अ‌धिक सकारात्मक और सामाजिक होता है। शोध के दौरान एक समूह को माकिल जैकसन की 'हील द वर्ल्ड' गीत सुनाया गया जबकि दूसरे समूह को सामान्य संगीत।

शोध के बाद पाया गया कि माइकल जैकसन का संगीत सुनने वाले समूह के बच्चे अपेक्षाकृत अधिक सामाजिक और व्यावहारिक हो गए।

7. पढ़ने की क्षमता बढ़ाता है
2009 में हुए एक शोध के मुताबिक संगीत सुनने से बच्चे बच्चों में पढ़ने की क्षमता बढ़ जाती है और वे परीक्षा में अच्छे अंक लाते हैं।

इस शोध में बच्चों को दो समूहों में बांटा गया। एक समूह को धीमे संगीत से साथ साल भर तक पढ़ने के लिए कहा गया जबकि दूसरे समूह को बिना संगीत के पढ़ने के लिए। इसमें पाया गया कि जो बच्चे संगीत सुनते-सुनते पढ़ते थे उनकी पढ़ने की क्षमता काफी बढ़ गई।

 

 

 

ब्रेस्ट कम कैसे करे- एक्सर्साइज़ टिप्स

Mon, 12/11/2017 - 06:00

ब्रेस्ट घटाने के लिए एक्सर्साइज़ से तेज तरीका या उपाय दूसरा कोई नही हो सकता| आपको जिम जा कर भारी भरकम वेट उठाने की ज़रूरत नही है बस आपको एक रेग्युलर एक्सर्साइज़ रुटीन बनाना है और उसका नियम से पालन करना है| कुछ ही दिनों में आपकी समसया दूर होगी और आपकी सेहत और वेट दोनों ही अच्छे जाएँगे| नीचे कुछ exercise  टिप्स हैं जिनसे आप अपने स्तन तेज़ी से घटा सकती हैं|

 

  • अगर आपका वेट ज्यादा है तो आप एरोबिक्स एक्सर्साइज़स से शुरुवात कर सकती हैं| रोजाना कुछ देर सीडियां चाड़ना, तेज चलना, साइकल चलना आदि कुछ अच्छी एक्सर्साइज़स हैं जिनसे आप अपना fat  कम कर सकती हैं|  हर रोज 30 मिनिट्स का सेशन रखिए और ये सभी exercises कीजिए| ऐसा रोजाना वीक में 5 बार करना है|
  • रोजाना सुबह और शाम 20 मिनिट्स जॉगिंग करने से आप कुछ ही दीनो में अपने ब्रेस्ट का साइज़ कम कर सकती हैं| अगर जॉगिंग ना की जा रही हो तो आप तेज़ी से चलिए| इससे आपका स्टॅमिना बनने लगेगा और फिर आपको जॉगिंग में परेशानी नही होगी|
  • तैराकी यानि स्विमिंग  एक अच्छी  exercise  है जो ना केवल आपके ब्रेस्ट को कम करने में हेलफूल है बल्कि इससे आप जल्दी अपना मोटापा भी घटा सकती हैं| साथ ही ये आपके स्तानो को टोन और टाइट भी करती है|
  • रोजाना pushups करने के कोशिश करिए क्योंकि ये चेस्ट पर कम करने वाली सबसे तेज एक्सर्साइज़ है|  और अगर हो सके तो pullups भी करें| इससे आपको अधिक लाभ मिलेगा|
  • अगर आप जिम में हैं  तो बेंच प्रेस, dumbbells प्रेस आदि exercises जो आपकी चेस्ट को टारगेट करती हो, करके आप अच्छा ब्रेस्ट साइज़ पा सकती हैं|

कुछ ज़रूरी टिप्स

  1. एक्सर्साइज़ करते समय कभी भी टाइट ब्रा ना पहने| हमेशा अच्छी फिटिंग वाली स्पोर्ट्स ब्रा पेहें कर ही एक्सर्साइज़ करें|
  2. स्मोकिंग और तंबाकू प्रॉडक्ट्स का कभी भी सेवन ना करें|
  3. डेली योगा आसान और पोज़ की प्रॅक्टीस करें|
  4. हल्के फुल्के आहार का ही सेवन करना सेहत और वेट के लिए लाभदायक है|
  5. अपने आपको फिज़िकल एक्टिव रखिए मतलब घर के काम करिए, गार्डेनिनिंग करिए ओर दूसरे ऐसे काम करिए जिससे आपकी कॅलरीस बर्न हो सके|
  6. रोजाना 8 घंटे की नींद लें| कम नींद के कारण मोटापा बढ़ता है|
  7. हमेशा स्ट्रेस फ्री रहने की कोशिश करें|

ये कुछ घरेलू नुस्खे, उपाय, डाइट और एक्सर्साइज़ टिप्स उपयोग करके आप जल्दी से अपने ब्रेस्ट का साइज़ कम कर सकती हैं| अगर आप कोई प्रॉडक्ट, दवा या कोई दूसरा ट्रीटमेंट use करने की सोच रही हैं तो उसके बारे में आप अपने डॉक्टर की सलाह ज़रूर लें| आप हमसे कुछ और जानकारी चाहती हैं तो हमें कॉमेंट या email कीजिए| हम आपकी प्राब्लम का इलाज जल्द से जल्द देने का अथक प्रयास करेंगे|

 

 

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सुंदर, सलोनी, छरहरी और सुडौल काया किसे पसंद नहीं है?

Sat, 12/09/2017 - 06:00

सुंदर, सलोनी, छरहरी और सुडौल काया किसे पसंद नहीं है? प्राय: सभी स्त्रियां ऐसा ही होना चाहती हैं किन्तु वातावरण, रहन-सहन, खान-पान दिनचर्या एवं अनेक प्रकार की मजबूरियों के कारण बहुतों को चुपचाप मन मारकर रह जाना पड़ता है।
आम जीवन में स्त्री-पुरुष दोनों में ही शारीरिक फिटनेस या सुडौलता के प्रति जिज्ञासा बढ़ी है, परिणामस्वरूप प्रत्येक छोटे-बड़े शहरों व कस्बों में आधुनिक उपकरणों से सुसज्जित व्यायामशाला, हैल्थ क्लब, जिम, क्लब एवं फिटेनस सेंटर दिखाई दे रहे हैं।
कभी-कभी यह भी देखने में आता है कि अल्पायु में ही शरीर का विकास इस प्रकार बेडौल हो जाता है कि आयु दुगनी-तिगुनी लगने लगती है तथा संबंधित अनेक विकृतियां दृष्टिगत हो जाती हैं। युवतियों को सूर्यनमस्कार, कटिचक्रासन, जानुशिरासन, गोरक्षासन, गोमुखासन, भुजंगासन, वातायनासन, गुल्डासन, उत्थिन कोणासन तथा प्राणायाम का अभ्यास करते रहने से स्वस्थ एवं सुडौल काया बनी रहती है।
दुबली-पतली एवं कमजोर महिलाओं की समस्याओं के समाधान के लिए सूर्यनमस्कार, मकरासन, हस्तपादासन, शलभासन आदि का अभ्यास करते हुए सब्जियों का सूप, फलों का रस, नींबू पानी में दो चम्मच शहद डालकर नित्य प्रति सुबह अवश्य ही पीते रहना चाहिए।
प्रौढ़ महिलाओं के जांघों पर प्राय: अनावश्यक मोटापा तथा भारीपन आ जाता है। पुट्ठा व कमर बेडौल हो जाते हैं। प्राय: प्रसव के बाद पेट भी ढीला होकर बेडौल व बड़ा हो जाता है। इस अवस्था में शरीर को स्वस्थ एवं सुडौल बनाये रखने के लिए गोमुखासन, मकरासन, गर्भासन, अद्र्धमस्स्येन्द्रासन, धनुरासन, समकोणासन, शवासन, सेतुबंधनासन, आदि आसनों का अभ्यास लाभदायक होता है।
इन आसनों के साथ ही प्राणायाम नियमित रूप से करते रहने से न केवल शरीर की विकृतियां ही दूर होती हैं बल्कि युवावस्था की सभी स्थितियां पूर्ववत् आ जाती हैं तथा आजीवन बनी रहती हैं।
प्रौढ़ावस्था की समस्याएं महिलाओं में प्राय: उम्र बढऩे के साथ-साथ ही बढ़ती चली जाती हैं। आयु बढऩे के साथ ही मोटापा अधिक बढ़ जाने से उनकी अनेक शारीरिक समस्याएं भी बढऩे लगती हैं।
इस अवस्था में सूक्ष्म व्यायाम, कटिचक्रासन, सूर्यनमस्कार, त्रिकोणासन, ताड़ासन, शलभासन, शिथिलापन, शवासन, योगनिद्रा, नौकासन एवं वीरभद्रासन आदि में जितना भी और जो भी हो सके, 20-30 मिनट तक नियमित रूप से प्रात:काल करना चाहिए। साथ ही प्राणायाम भी करते रहना चाहिए।
उपरोक्त आसनों के साथ ही निम्नांकित वैज्ञानिक सुझावों का भी पालन स्वस्थ एवं सुडौल शरीर के लिए लाभकारी होता है।

  • भोजन करने के आधे घंटे पहले और आंधे घंटे बाद में ही पानी पीना चाहिए। खाना खाने के बीच में पानी पीने से बचना चाहिए।
  • खाना खाने के कुछ मिनट पहले केवल सलाद चबा-चबाकर खायें।
  • योगाभ्यास तथा प्राणायाम को नियमित एवं खाली पेट ही प्रात: या सायंकाल करना चाहिए।

गुरु-शिष्य परम्परा

Fri, 12/08/2017 - 19:18

गुरु-शिष्य परम्परा आध्यात्मिक प्रज्ञा का नई पीढ़ियों तक पहुंचाने का सोपान। भारतीय संस्कृति में गुरु-शिष्य परम्परा के अन्तर्गत गुरु (शिक्षक) अपने शिष्य को शिक्षा देता है या कोई विद्या सिखाता है। बाद में वही शिष्य गुरु के रूप में दूसरों को शिक्षा देता है। यही क्रम चलता जाता है। यह परम्परा सनातन धर्म की सभी धाराओं में मिलती है। गुरु-शिष्य की यह परम्परा ज्ञान के किसी भी क्षेत्र में हो सकती है, जैसे- अध्यात्म, संगीत, कला, वेदाध्ययन, वास्तु आदि। भारतीय संस्कृति में गुरु का बहुत महत्व है। कहीं गुरु को 'ब्रह्मा-विष्णु-महेश' कहा गया है तो कहीं 'गोविन्द'। 'सिख' शब्द संस्कृत के 'शिष्य' से व्युत्पन्न है।

'गु' शब्द का अर्थ है अंधकार (अज्ञान) और 'रु' शब्द का अर्थ है प्रकाश ज्ञान। अज्ञान को नष्ट करने वाला जो ब्रह्म रूप प्रकाश है, वह गुरु है। आश्रमों में गुरु-शिष्य परम्परा का निर्वाह होता रहा है। भारतीय संस्कृति में गुरु को अत्यधिक सम्मानित स्थान प्राप्त है. भारतीय इतिहास में गुरु की भूमिका समाज को सुधार की ओर ले जाने वाले मार्गदर्शक के रूप में होने के साथ क्रान्ति को दिशा दिखाने वाली भी रही है.भारतीय संस्कृति में गुरु का स्थान ईश्वर से भी ऊपर माना गया है.

“गुरुर ब्रह्मा गुरुर विष्णु गुरुर देवो महेश्वर:

गुरुर साक्षात् परम ब्रह्म तस्मै श्री गुरुवे नमः”

प्राचीन काल में गुरु और शिष्य के संबंधों का आधार था गुरु का ज्ञान, मौलिकता और नैतिक बल, उनका शिष्यों के प्रति स्नेह भाव, तथा ज्ञान बांटने का निःस्वार्थ भाव. शिष्य में होती थी, गुरु के प्रति पूर्ण श्रद्धा, गुरु की क्षमता में पूर्ण विश्वास तथा गुरु के प्रति पूर्ण समर्पण एवं आज्ञाकारिता. अनुशासन शिष्य का सबसे महत्वपूर्ण गुण माना गया है.

आचार्य चाणक्य ने एक आदर्श विद्यार्थी के गुण एस प्रकार बताये हैं-

“काकचेष्टा बकुल ध्यानं श्वान निद्रा तथेव च

अल्पहारी गृहत्यागी विद्यार्थीनाम पंचलक्षणं”

गुरु और शिष्य के बीच केवल शाब्दिक ज्ञान का ही आदान प्रदान नहीं होता था बल्कि गुरु अपने शिष्य के संरक्षक के रूप में भी कार्य करता था. उसका उद्द्येश्य रहता था कि गुरु उसका कभी अहित सोच भी नहीं सकते. यही विश्वास गुरु के प्रति उसकी अगाध श्रद्धा और समर्पण का कारण रहा है.

गीता में भगवान श्रीकृष्ण जी ने गुरु-शिष्य परम्परा को ‘परम्पराप्राप्तम योग’ बताया है.गुरु-शिष्य परम्परा का आधार सांसारिक ज्ञान से शुरू होता है,परन्तु इसका चरमोत्कर्ष आध्यात्मिक शाश्वत आनंद की प्राप्ति है,जिसे ईश्वर -प्राप्ति व मोक्ष प्राप्ति भी कहा जाता है.बड़े भाग्य से प्राप्त मानव जीवन का यही अंतिम व सर्वोच्च लक्ष्य होना चाहिए.”

हारमोनियम के गुण और दोष

Fri, 12/08/2017 - 19:16

हारमोनियम में गुण और दोष दोनों पाए जाते हैं दोनों का विवेचन इस प्रकार किया जा सकता है

गुण
1. संगीत के प्रचार और प्रसार में हारमोनियम अत्यंत उपयोगी सिद्ध हुआ है इस वाद्य का बजाना अत्यंत सुगम है पर्दों पर उंगलियों को रखकर धोंकनी से हवा देने पर स्वर अपने आप बजने लगते हैं हारमोनियम बजा कर गाते-गाते छात्रों में संगीत सीखने की तीव्र इच्छा उत्पन्न होती है धीरे-धीरे कालांतर मैं वह एक महान संगीतकार बन जाते हैं
2. हारमोनियम में यह गुण पाया जाता है कि उसे अन्यान्य तंत्र वाद्य की भांति मिलाने की आवश्यकता नहीं पड़ती इसमें शुद्ध विकृत 12 स्वर निर्धारित है हारमोनियम बजाते ही स्वर अपनी अपनी मर्यादा में सुनाई देने लगते हैं।
3. किसी भी तंत्र वाद्य अथवा अवनद्ध वाद्य को मिलाने के लिए हारमोनियम की आवश्यकता पड़ती है कुछ गिने-चुने प्रकांड संगीतकार को छोड़ कर रहे सभी संगीतज्ञ वाद्यो को मिलाने के लिए हारमोनियम का सहारा लेते हैं सितार या तानपुरे जिन जिन स्वर पर मिलाना होता है हारमोनियम में उन्ही स्वरों को लगातार बजाकर अन्यान्य तंत्र या अवनद्ध वाद्य को मिलाया जाता है।
4. प्रारंभिक छात्रों के लिए हारमोनियम अत्यंत सहायक सिद्ध होता है तानपुरा आदि पर स्वरों का अभ्यास करते समय गुरु अथवा शिक्षक का रहना अत्यंत आवश्यक रहता है क्योंकि तानपुरे पर सा और पा को छोड़कर अन्य स्वर निर्धारित नहीं हैं और ना ही स्वतंत्र रुप से बचते हुए सुनाई पढ़ते हैं अन्य स्वर स्वयंभू नाद के रूप में उत्पन्न होते अवश्य है किंतु उनको सिद्ध संगीतकार ही सुन सकते हैं प्रारंभिक छात्र नहीं ।हारमोनियम बजा कर गाते समय शिक्षक का रहना आवश्यक नहीं है हारमोनियम के स्वर अपनी ऊंचाई और निचाई में अपने आप बजते हैं छात्र उनका अनुकरण कर ज्ञान कर लेते हैं।
दोष
1. हारमोनियम के स्वर कितने तेज और कर्कश होते हैं कि गाते समय गायक के कंठ से निकले हुए स्वर स्पष्ट रुप से सुनाई नहीं पड़ते हारमोनियम के स्वरों की आवाज से कंठ निःसृत स्वर दब जाते हैं।
2. हारमोनियम के स्वर एक दूसरे से स्फुट होते हैं एक के बाद दूसरा स्वर पर जाते समय तारतम्यता नहीं रहती ऐसी स्थिति में मींड या गमक सफलतापूर्वक उत्पन्न नहीं किया जा सकता जबकि भारतीय संगीत में मींड और गमक का स्थान अत्यंत महत्वपूर्ण है
3. हारमोनियम पर स्वर साधना करने से स्वरों में वह घनत्व उत्पन्न नहीं हो पाता जो तानपुरे पर अभ्यास करने से होता है क्योंकि हारमोनियम के स्वर मानव कण्ठ के अनुकूल नहीं होते ।मानव कंठ के स्वरों के अनुकूल सदा तंत्र वाद्य से ही निकले स्वर पर होते हैं।
4 हारमोनियम बजाते समय आवेश में आकर जब गायक धोंकनी पर अधिक जोर देकर बजाने लगते हैं और उंगलियां को पर्दे पर जोर से पटकने लगते हैं तो स्वरों की मधुरता प्रायः नष्ट हो जाती है।
5. हारमोनियम एक पाश्चात्य वाद्य है वह पाश्चात्य संगीत के लिए भले उपयुक्त हो ,किंतु भारतीय संगीत के लिए उतना उपयुक्त नहीं है ।पाश्चात्य संगीत में शुद्ध विकृत 12 स्वर के ही आधार पर गायन और वादन किया जाता है ।इस में स्वरों के केवल तीन अवस्थाएं होती हैं शुद्ध कोमल तथा तीव्र किंतु भारतीय संगीत में कुछ राग ऐसे हैं जिनमें श्रुतियों का भी सहारा लेना पड़ता है इस प्रकार कोमल गांधार कोमलतर गांधार तथा कोमलतम गांधार आदि प्रत्येक स्वर की तीन अवस्थाएं होती हैं दरबारी ,मुल्तानी तथा बाहर आदि राहों में गंधार की कोमल अवस्था भिन्न-भिन्न पाई जाती है इन राहों की ठीक-ठीक अवधारणा हारमोनियम पर संभव नहीं है क्योंकि हारमोनियम में शुद्ध और विकृत 12 स्वरों के अतिरिक्त अन्यान्य स्वर नहीं पाए जाते ।अतः भारतीय संगीत के सभी रागों को व्यक्त करने की क्षमता हारमोनियम में नहीं पाई जाती है।

अतः प्रारंभिक अवस्था में हारमोनियम का सहारा लेना कुछ ठीक है लेकिन जैसे जैसे संगीत मैं आगे सीखते हैं आप हारमोनियम का सहारा लेना बंद कर दें
गायन अथवा वादन नृत्य सीखते समय अगर गुरु शिष्य परंपरा उच्च कोटि की है तो कोई भी परेशानी नहीं होगी परेशानी तब होती है जब गुरु शिष्य परंपरा उच्च कोटि की ना हो अतः ध्यान रखें

 

 

 

Source: https://www.facebook.com/onlineclassicalmusic/Tags: हारमोनियम की जानकारीहारमोनियम का इतिहासहारमोनियम के प्रकारहारमोनियम बजानाहारमोनियम वादकहारमोनियम की कीमतहारमोनियम के भागहारमोनियम राग

संगीत घराने और उनकी विशेषताएं

Fri, 12/08/2017 - 19:13

घराना ( परिवार), हिंदुस्तानी शास्त्रीय संगीत की विशिष्ट शैली है, क्योंकि हिंदुस्तानी संगीत बहुत विशाल भौगोलिक क्षेत्र में विस्तृत है, कालांतर में इसमें अनेक भाषाई तथा शैलीगत बदलाव आए हैं।

इसके अलावा शास्त्रीय संगीत की गुरु-शिष्य परंपरा में प्रत्येक गुरु वा उस्ताद अपने हाव-भाव अपने शिष्यों की जमात को देता जाता है।

घराना किसी क्षेत्र विशेष का प्रतीक होने के अलावा, व्यक्तिगत आदतों की पहचान बन गया है, यह परंपरा ज़्यादातर संगीत शिक्षा के पारंपरिक तरीके तथा संचार सुविधाओं के अभाव के कारण फली-फूली, क्योंकि इन परिस्थितियों में शिष्यों की पहुँच संगीत की अन्य शैलियों तक बन नहीं पाती थी।

हिंदुस्तानी संगीत के प्रमुख घराने

1. ग्वालियर घराना

2. आगरा घराना

3. किराना घराना

4. बनारस घराना

5. जयपुर-अतरौली घराना

6. रामपुर-सहस्वान घराना

7. पटियाला घराना

8. दिल्ली घराना

9. भिंडी बाज़ार घराना

10. मेवाती घराना

1- ग्वालियर घराना-

ग्वालियर घराना हिंदुस्तानी संगीत का सबसे प्राचीन

घराना है। हस्सू खाँ, हद्दू खाँ के दादा उस्ताद नत्थन पीरबख्श को इस घराने का जन्मदाता कहा जाता है।

दिल्ली के राजा ने इनको अपने पास बुला लिया था। इनके दो पुत्र थे-कादिर बख्श और पीर बख्श। इनमें कादिर बख्श को ग्वालियर के महाराज दौलत राव जी ने अपने राज्य में नौकर रख लिया था। कादिर बख्श के तीन पुत्र थे जिनके नाम इस प्रकार हैं- हद्दू खाँ, हस्सू खाँ और नत्थू खाँ। ये तीनों भाई मशहूर ख्याल गाने वाले और ग्वालियर राज्य के दरबारी उस्ताद थे। इसी परम्परा के शिष्य बालकृष्ण बुआ इचलकरजीकर थे। इनके शिष्य पं. विष्णु दिगम्बर पलुस्कर थे। पलुस्कर जी के प्रसिद्ध शिष्य ओंकारनाथ ठाकुर, विनायक राव पटवर्धन, नारायण राव व्यास तथा वीणा सहस्रबुद्धे हुए जिन्होंने भारतीय शास्त्रीय संगीत का खूब प्रचार किया।

संस्थापक

हद्दू खाँ, हस्सू खाँ और नत्थू खाँ

विशेषतायें

1. खुली आवाज़ का गायन

2. ध्रुपद अंग का गायन

3. अलापों का निराला ढंग

4. सीधी सपाट तानों का प्रयोग

5. गमक का प्रयोग

6. बोल तानों का विशेष प्रयोग

प्रतिपादक

बालकृष्ण बुआ इचलकरजीकर

विष्णु दिगम्बर पलुस्कर

ओंकारनाथ ठाकुर

विनायक राव पटवर्धन

नारायण राव व्यास

वीणा सहस्रबुद्धे

2-आगरा घराना-

आगरा घराना हिंदुस्तानी संगीत के प्रसिद्ध घरानों में से एक है। आगरा घराने के जन्मदाता तानसेन के दामाद हाजी सुजान साहब थे। आगरा घराने में जिन्होंने पूरे देश में ख्याति प्राप्त की उनका नाम था उस्ताद फ़ैयाज़ खाँ। फ़ैयाज़ खाँ की आवाज़ बहुत दमदार थी और ये महफिल में अपना अनोखा रंग जमा देते थे।

विशेषता

1. नोम-तोम में आलाप करना

2. खुली जोरदार आवाज़ में गाना

3. लय ताल पर विशेष जोर।

संस्थापक

हाजी सुजान खान और उस्ताद घग्घे खुदा बख्श

प्रतिपादक

फ़ैयाज़ खान

लताफ़त हुसैन खान

दिनकर काकिनी

3- किराना घराना

किराना घराना भारतीय शास्त्रीय संगीत और गायन की हिंदुस्तानी ख़याल गायकी की परंपरा को वहन करने वाले हिंदुस्तानी घरानों में से एक है। किराना घराने का नामकरण उत्तर प्रदेश के प्रबुद्ध नगर ज़िले के एक तहसील क़स्बा किराना से हुआ माना जाता है। यह उस्ताद अब्दुल करीम खाँ का जन्म स्थान भी है, जो बीसवीं सदी में किराना शैली के सर्वाधिक महत्त्वपूर्ण भारतीय

संगीतज्ञ थे।

संस्थापक

अब्दुल करीम खाँ और अब्दुल वाहिद खान

प्रतिपादक

सवाई गंधर्व

सुरेशबाबू माने

प्रभा अत्रे

हीराबाई बादोडकर की शिष्या

माणिक वर्मा

सुरेशबाबू माने

4- बनारस घराना

बनारस घराना ( अंग्रेज़ी : Banaras Gharana )

हिन्दुस्तानी शास्त्रीय संगीत के प्रसिद्ध घरानों में गिना जाता है। शास्त्रीय संगीत के क्षेत्र में इस घराने का बहुत ही महत्त्वपूर्ण योगदान है। उत्तर प्रदेश का बनारस घराना जयपुर घराने के समकालीन माना जाता है। इस घराने में गति व श्रंगारिकता के स्थान पर प्राचीन व प्रारंभिक शैली पर अधिक जोर दिया गया। बनारस घराने के नाम पर प्रख्यात नृत्यगुरु सितारा देवी के पश्चात् उनकी पुत्री कथक क्वीन जयंतीमाला ने इसके वैभव और छवि को बरकरार रखने का प्रयास किया है एवं गुरु-शिष्य परम्परा को आगे बढ़ाने के लिए प्रयासरत हैं।

शैली

यह घराना गायन और वादन दोनों कलाओं के लिए प्रसिद्ध रहा है। इस घराने के गायक ख़्याल गायकी के लिए जाने जाते हैं। इसके साथ ही बनारस घराने के तबला वादकों की भी अपनी एक स्वतंत्र शैली रही है। सारंगी वादकों के लिए भी यह घराना काफ़ी प्रसिद्ध रहा है। इस घराने की गायन एवं वादन शैली पर उत्तर भारत के लोक गायन का गहरा प्रभाव है। कुछ विद्वानों का कथन है कि आर्यों के भारत में स्थायी होने से पहले यहाँ की जनजातियों में संगीत विद्यमान था। उसका आभास बनारस के लोक संगीत में दिखता है। ठुमरी मुख्य रूप से उत्तर प्रदेश की ही देन है। लखनऊ में इसकी पैदाइश हुई थी और बनारस में इसका विकास हुआ।

बनारसी ठुमरी

बनारसी ठुमरी के दो प्रकार हैं-

1. धनाक्षरी अर्थात शायरी ठुमरी – यह द्रुतलय में गाई जाती है और द्रुत तानों के द्वारा प्रसारित की जाती है।

2. बोल की ठुमरी – इसे मंद गति के साथ गाया जाता है और एक-एक शब्द को बोलते हैं।

बनारस अंग की ठुमरी में चैनदारी है। यहाँ की बोल-चाल और कहने का अलग क़िस्म का होता है। यहाँ की ठुमरी में ठहराव और अदायगी का अपना एक अलग रंग है। इसमें ख़ूबसूरती अपेक्षाकृत अधिक रहती है। ग्वालियर के राजा मानसिहं तोमर (तंवर) ठुमरी के आदि प्रवर्तक थे। उन्हीं के नाम पर इसका नाम ‘तनवरी’ पड़ा था, जो बाद में बिगड़कर ठुमरी हो गया। ठुमरी के इतिहास में मौजुद्दीन ख़ान, ग्वालियर के भैयासाहब गणपतराव और नवाब वाजिद अलीशाह का नाम भी महत्त्वपूर्ण है। बनारस की ठुमरी पंडित जगदीप मिश्र जी से शुरू हुई। पंडित जगदीप मिश्र, भैया गणपतराव एवं मौजुद्दीन ख़ान के समय से विलंबित लय की बोल बनाव ठुमरी के गाने का प्रचलन बढ़ा तथा बनारस में इसका अत्यधिक प्रचार-प्रसार हुआ, तत्पश्चात यही ठुमरी पूरब की बोलियाँ तथा लोकगीतों के प्रभाव से और अधिक भाव प्रधान हो गई, और अंत में ‘बनारसी ठुमरी’ के नाम से रूढ़ हो गई।

घराने की ख़्याल शैली

बनारस घराने का ख़्याल शैली में भी महत्त्वपूर्ण योगदान है। इस गायन पद्धति में शब्द का स्पष्ट उच्चारण किया जाता है। भावनाओं को स्वरों के माध्यम से सशक्त रूप से प्रकट किया जाता है। बनारस घराने के गायक ख़्याल गायन के लिए विशेष तौर पर पहचाने जाते हैं। ख़्याल का तात्पर्य है- ‘कल्पना’। इसका अभिव्यक्तिकरण विविधता से और सावधानी पूर्वक किया जाना चाहिए। ख़्याल गायन हज़ारों वर्षों की प्राचीन परंपरा है। यह प्राचीन परंपरा मुग़ल बादशाहों के दरबार में ध्रुपद पद्धति से गायी जाती थी। ख़्याल में हिन्दू और मुस्लिम कवियों की शृंगारिक या भक्ति रस में समर्पित रचनाओं का समावेश है। बनारस घराने के ख़्याल गायन में बनारस एवं गया की ठुमरी का समावेश है।

तबला प्रस्तुति

इस घराने की तबला वादक प्रस्तुति की अपनी एक स्वतंत्र पद्धति रही है। लगभग दो सौ वर्ष पूर्व पंडित रामसहाय मिश्र का जन्म 1780 में बनारस में हुआ था। बारह वर्ष की अल्प आयु में ही पंडित जी को अपने गुरु से तबले का सर्वोत्तम प्रशिक्षण प्राप्त हुआ था। वे जब मात्र केवल 21 वर्ष के थे, तभी उन्होंने नवाब वाजिदअली शाह के दरबार में सात दिन तक बिना रुके और पुनरावृत्ति न करते हुए तबला वादन किया था। उन्होंने अपनी कला का प्रदर्शन लोगों के सामने बंद कर अपना ध्यान तबला वादन की नयी पद्धति की खोज करने में केन्द्रित कर दिया था। इन्होंने तबले पर हाथ रखने की पद्धति और उँगलियों का प्रयोग नए ढंग से करके तबला वादन की नई पद्धति की खोज की, जिसका नाम बनारसी बाज़ पड़ा। इस पद्धति का उपयोग एकल वादन के साथ ध्रुपद गायन, जो पखावज के साथ गाया जाता है तथा ठुमरी , टप्पा और अनेक प्रकार के वाद्यों के साथ संगत में होने लगा।

प्रसिद्ध संगीतज्ञ

बनारस घराना गायन और वादन दोनों के लिए ही बहुत प्रसिद्ध रहा है। इस घराने के कुछ संगीतज्ञों के नाम इस प्रकार हैं-

1. शहनाई वादक – उस्ताद बिस्मिल्ला ख़ान, पंडित रामसहाय मिश्र (जिन्होंने ‘बनारसी बाज़’ का शोध किया था)

2. तबला वादक – पंडित कंठे महाराज, पंडित अनोखे लाल,

पंडित किशन महाराज एवं पंडित गुदई महाराज आदि।

3. पखावज और मृदंग वादक – बनारस के पंडित मदन मोहन, पंडित भोलानाथ पाठक और पंडित अमरनाथ मिश्र आदि।

सुप्रसिद्ध सितार वादक पंडित रविशंकर का जन्म भी

बनारस में हुआ। श्रेष्ठ संतूर वादक पंडित शिवकुमार शर्मा के

पिता पंडित अमर दत्त शर्मा ने बनारस घराने के महान गायक पंडित बड़े रामदास जी से शिक्षा प्राप्त की थी। बनारस घराना सारंगी वादकों के लिए भी प्रसिद्ध रहा है, जिसमें प्रमुख है-

1. शम्भू सुमीर

2. गोपाल मिश्र

3. हनुमान प्रसाद मिश्र

4. नारायण विनायक

बनारसी ठुमरी एवं ख़्याल गायन यहाँ की विशिष्ट पद्धति है। ठुमरी गायिकाओं में रसूलन बाई, बड़ी मोती बाई, सिद्धेश्वरी देवी और गिरिजा देवी प्रमुख हैं। ख़्याल गायन में पंडित बड़े रामदास जी, पंडित छोटे रामदास जी, पंडित महादेव प्रसाद मिश्र, पंडित राजन-साजन मिश्र और उनके पुत्र एवं शिष्य इस परंपरा को आगे बढ़ा रहे है।

5- जयपुर-अतरौली घराना

जयपुर-अतरौली घराना ( अंग्रेज़ी :

Jaipur-Atrauli Gharana )

हिंदुस्तानी संगीत के प्रसिद्ध

घरानों में से एक है। इसे ‘जयपुर घराना’ और ‘अल्लादिया ख़ान घराना’ नाम से भी जाना जाता है। उस्ताद अल्लादिया ख़ान इस घराने के संस्थापक कहे जाते हैं।

जयपुर घराने की शुरुआत करने वालों में भानु जी का नाम भी आता है, जिन्हें किसी संत द्वारा ताण्डव नृत्य की शिक्षा प्राप्त हुई। इनके बेटे मालु जी थे, जिन्होंने अपने पिता के सीखे हुए

नृत्य की शिक्षा अपने दोनों बेटों- लालू जी और कान्हू जी को दी। कान्हू जी ने

वृंदावन जा कर नटवरी नृत्य की शिक्षा भी प्राप्त की। इनके दो लड़के थे- गीधा जी और शेजा जी। पहले ने ताण्डव व दूसरे ने लास्य अंग में विशेष योग्यता प्राप्त की।

नृत्य शैली

जयपुर घराने से तात्पर्य कथक नृत्य की राजस्थानी परम्परा से है। इसके नर्तक ज़्यादातर हिन्दू राजाओं के दरबारों से संबद्ध रहे, अतः जहाँ एक ओर कथक नृत्य की बहुत-सी प्राचीन परम्परायें इस घराने में अभी भी सुरक्षित हैं, वहीं अपने आश्रायदाताओं की रुचि के अनुसार इनके नृत्य में जोश व तेज़ी तैयारी अधिक दिखाई पड़ती है। पखावज की मुश्किल तालों, जैसे- धमार, चौताल, रूद्र, अष्टमंगल, ब्रह्मा, लक्ष्मी, गणेश आदि ये अत्यंत सरलता से नाच लेते हैं। इनके द्वारा तत्कार में कठिन लयकारयों का प्रदर्शन बहुत प्रसिद्ध है। जितना पैरों की सफ़ाई पर इसमें ध्यान दिया जाता है, उतना हस्तकों पर नहीं। नृत्य के बोलों के अलावा,

कवित्त , प्रिमलू, पक्षी परन, जाती परन आदि के विभिन्न प्रकार के बोलों का प्रयोग इस घराने की विशेषता है। भाव प्रदर्शन में सात्विकता रहती है और ठुमरी की अपेक्षा भजन पदों पर भाव दिखाये जाते हैं।

विशेषता

1. गीत की बंदिश छोटी होना

2. खुली आवाज़ में गाना,

3. आवाज़ बनाने का निराला ढंग

4. वक्र तानें।

प्रतिपादक

मल्लिकार्जुन मंसूर

केसरभाई केरकर

किशोरी अमोनकर

श्रुति सदोलीकर

पद्म तलवलकर

अश्विनी भिडे

प्रमुख नर्तक

कथक की जन्मस्थली राजस्थान की इस धरा से जुड़े कथक के तीर्थ जयपुर घराने में नृत्य के दौरान पाँव की तैयारी, अंग संचालन व नृत्य की गति पर विशेष ध्यान दिया जाता है, इसीलिए सशक्त नृत्य के नाम पर जयपुर घराना शीर्ष स्थान कायम किए हुए है। नृत्याचार्य गिरधारी महाराज व शशि मोहन गोयल के अथक प्रयासों के दम पर यह घराना अपनी पूर्व छवि कायम किए हुए है। इनकी शिष्याओं ज्योति भारती गोस्वामी, कविता सक्सेना, निभा नारंग, रीमा गोयल, प्रीति सोनी, मधु सक्सेना और गीतांजलि आदि अनेक कलाकारों ने राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर जयपुर घराने का काफ़ी नाम किया है। जयपुर घराने को शीर्ष पर पहुँचाने में ‘ पद्मश्री ‘ से सम्मानित उमा शर्मा, प्रेरणा श्रीमाली, ‘पद्मश्री’ शोवना नारायण, राजेन्द्र गंगानी और जगदीश गंगानी के योगदान को नज़रंदाज़ नहीं किया जा सकता है। इन कलाकारों ने विदेशों में भारतीय शास्त्रीय नृत्य की जो अमिट छाप छोड़ी है, वह अविस्मरणीय है।

6- रामपुर-सहस्वान घराना

रामपुर-सहस्वान घराना हिंदुस्तानी संगीत के प्रसिद्ध

घरानों में से एक है। रामपुर सहस्वान घराने की इस शैली में

स्वर की स्पष्टता पर एक तनाव है और विकास और राग का विस्तार एक चरण दर चरण प्रगति के माध्यम से किया जाता है।

संस्थापक

उस्ताद इनायत खान

प्रतिपादक

ग़ुलाम मुस्तफ़ा खान

उस्ताद निसार खान

उस्ताद राशिद खान

सुलोचना

बृहस्पति

7- पटियाला घराना

पटियाला घराना हिंदुस्तानी संगीत के प्रसिद्ध घरानों में से एक है। पटियाला घराने दिल्ली घराने की एक शाखा के रूप में माना जाता है।

संस्थापक

उस्ताद फ़तेह अली खान

उस्ताद अली बख्श

प्रतिपादक

बड़े ग़ुलाम अली ख़ाँ

अजॉय चक्रवर्ती

रज़ा अली खान

बेगम अख़्तर

निर्मला देनी

नैना देवी

परवीन सुल्ताना

8- दिल्ली घराना

दिल्ली घराना हिंदुस्तानी संगीत के प्रसिद्ध घरानों में से एक है। तानरस खान और शब्बू खान इस घराने के प्रवर्तक माने जाते हैं। तानरस खान की तान बहुत मशहूर थी। इन्होंने तानों का बहुत अभ्यास किया था। इनके पुत्र उमराव खाँ हुए जिन्होंने घराने को आगे चलाया।

संस्थापक

उस्ताद मम्मन खान

प्रतिपादक

चांद खान

नसीर अहमद खान

उसमान खान

इक़बाल अहमद खान

कृष्णा बिष्ट

9- भिंडी बाज़ार घराना

भिंडी बाज़ार घराना हिंदुस्तानी संगीत के प्रसिद्ध

घरानों में से एक है। भिंडी बाज़ार घराने की सबसे विशिष्ट विशेषता खयाल है, जो खुले आवाज़ की प्रस्तुति है। आवाज़ का उपयोग कर, सांस नियंत्रण और लंबे मार्ग की एक सांस में गायन पर एक तनाव है।

संस्थापक

उस्ताद छज्जू खान

प्रतिपादक

उस्ताद अमन अली खान

शशिकला कोरटकर

अंजनीबाई माल्पेकर

10- मेवाती घराना

मेवाती घराना हिंदुस्तानी संगीत के प्रसिद्ध घरानों में से एक है। यह अपनी शैली भाव प्रधान नोट्स के माध्यम से राग का मूड के विकास को महत्व देता है। यह पाठ के अर्थ को समान महत्व देता है।

संस्थापक

घग्गे नज़ीर खान

प्रतिपादक

पंडित जसराज

मोती राम

मणिराम

संजीव अभ्यंकर

 

 

 

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यदि आप अनिद्रा से पीड़ित है

Fri, 12/08/2017 - 06:00

यदि आदतन आप को रात को अच्छी नींद नहीं आती,तो यह संभव है कि आप की उम्र तेजी से ज्यादा बढ़ रही है और इसके अतिरिक्त आप को अच्छा नहीं लगता होगा और आपकी भ्रमित सोच होगी | जब हम नींद में होते हैं तब हमारा शरीर के कोशिका स्तर में सुधार होता है और विषाक्त पदार्थों का निष्कासन होता है | इसलिये प्रतिदिन ६-८ घंटों की नींद आवश्यक है |

यदि आप की पर्याप्त नींद नहीं होती, तो योग इसमें सहायता करेगा | निरंतर योग के अभ्यास से कई रोगों का निदान हुआ है जिसमें अनिद्रा और असामान्य नींद की आदतें शामिल है | दिन के अंत में योग तनाव से मुक्ति देता है जिससे रात में अच्छी नींद आती है |

रात की अच्छी नींद हमारे पहुँच में है और सोने की दिनचर्या स्थापित करने के लिये निदान की अनुशंसा की जाती है |निम्न योग मुद्रायें आपको आराम और शांतिपूर्ण निद्रा प्रदान करने में सहायक होंगी |

हस्तपदासन: यह पीठ के मासपेशियों में रीड की हड्डीमें खिंचाव लाता है, रक्त का प्रवाह बढ़ा कर तंत्रिका तंत्र को मजबूत करता है और रीड की हड्डी में कोमलता प्रदान करता है |

मार्जारीआसन: रीड की हड्डी के लचीलेपन के लिये उत्तम खिंचाव देता है | यह पाचन अंगों की मालिश करने में सहायक है जिससें पाचन में सुधार होता है और आप को अच्छी नींद आने में सहायता मिलती है | इससे रक्त परिसंचरण में सुधार होता है और मन को विश्राम मिलता है |

शिशुआसन : पीठ में गहन विश्राम देने वाला खिंचाव जिससे तंत्रिका तंत्र शांत हो जाता है और आप शांति से सो सकते हैं |

बद्धाकोनासन : इस मुद्रा से लंबे समय तक खड़े या चलने से आई थकान को दूर करने में सहायता मिलती है | भीतरी जांघों,ऊसन्धि और घुटनों के लिये अच्छा खिंचाव मिलता है |

विपरीताकरनी

  • पीठ के बल सीधे लेट जायें | पहले बायां पैर ऊपर उठायें और फिर दाहिना पैर ऊपर उठायें और दोनों पैरों को दीवार के सहारे से ऊपर रखें |
  • अब अपनी आँखों को बंद कर लें और गहरी सांसे लीजियें और इस मुद्रा में विश्राम करें | आप रोशनी से बचने के लिये आँखों पर पट्टी लगा सकते हैं | जब तब आप इस मुद्रा में आराम से बने रह सकते हैं तब तक बने रहें और फिर इस मुद्रा से बाहर आ जायें और फिर धीरे धीरे पैरों को निचे की ओर ले आयें |

थके हुयें पैरों के लिये उत्तम मुद्रा, मस्तिष्क में रक्त प्रवाह बढ़ता है और सिर के दर्द से निदान मिलता है और मन शांत होता है | इसके अलावा भोजन के उपरांत शवासन में लेटना और योग निद्रा करने से पूरे तंत्र को शांत करने में सहायता मिलती है |

नींद के विशेषज्ञ अक्सर आदर्श नींद के दिनचर्या के प्रभाव के बारे में बताते हैं जिससे आपके शरीर को संकेत मिल सके कि यह सोने का समय है और वह सोने की तैयारी कर सके | आप अपने दिनचर्या में नाड़ी शोधन प्राणायाम भी शामिल कर सकते हैं जिससे आप तनाव मुक्त होकर शांति से सो सके |

अच्छी नींद के लिये अन्य सुझाव

  • भस्रिका प्राणायाम को देर रात करने से बचें | उस से आप में बहुत ऊर्जा भर जायेगी और आप को नींद आने में बाधा उत्पन्न करेगी |
  • देर रात डरावनी फ़िल्म देखने से बचे क्योंकि उसका विचार आपके मन में पूरी रात आता रहेगा | सोने से पहले कोमल वाद्य संगीत जैसे वीणा वादन , मंत्रोचारण या ज्ञान को सुनना अच्छा होता है |
  • अपने खुद के नींद का एक आदर्श तरीका बनायें | दिन के समय सोने का सुझाव नहीं दिया जाता | इससे जैविक घड़ी बाधित होती है | आदर्श के रूप में दोपहर में आधे घंटे सोना और रात में ६-८ घंटे सोना अच्छी बात है |
  • आपने दिन भर क्या किया इसका आत्म चिंतन करें |संतोष रखें और प्रार्थना करके आनंदमय और आरामदायक मन के साथ सोने जायें | अपने बिस्तर को सोने से पहले साफ कर लें |
  • अपने रात्रि का भोजन रात में ८.३० तक कर लें | अपने अंतिम भोजन और सोने के समय के मध्य में करीब २ घंटे का अंतराल रखें |
  • यदि आपके जीवन साथी या प्रियजनों के साथ आपका झगड़ा हुआ है तो यह सुनिश्चित कर लें कि वह सुलझ जायें | उसे मन में रखने से आपकी नींद खराब तो होगी ही बल्कि अगला दिन भी खराब हो जायेगा |
  • रात्रि में उत्तेजक चीजों का सेवन करने से बचे विशेष रूप से यदि आप अनिद्रा से पीड़ित है |
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ब्रेस्ट का आकार कैसे कम करें माइक्रो लिपो से

Thu, 12/07/2017 - 06:00

यह एक ऐसी प्रक्रिया है, जिसके अंतर्गत आपके स्तनों को एक छुरी की मदद से हल्का सा काटा जाता है, जिससे कि काफी मात्रा में टिश्यूस को बाहर निकाला जा सके। यह आपके स्तनों के आकार को छोटा करने के लिए काफी हद तक एक सुरक्षित प्रक्रिया मानी जाती है। इसका असर इतना ज़्यादा होता है, कि आपके स्तनों का आकार वर्तमान रूप से 50 % तक भी कम हो सकता है। ऐसे कई अच्छे, भरोसेमंद और अनुभवी शल्य चिकित्सक हैं, जो आपके लिए इस प्रक्रिया को सफल बनाने की पूरी तरह से क्षमता रखते हैं।

ब्रेस्ट कम करने के लिए घरेलू नुस्खे 

ऐसी काफी सुरक्षित विधियां हैं, जिनका प्रयोग आप अपने स्तनों का आकार छोटा करने की प्रक्रिया के दौरान कर सकती हैं। क्योंकि आपकी छाती के ऊपर ज़रुरत से ज़्यादा वज़न का होना आपके लिए काफी हानिकारक सिद्ध हो सकता है, अतः आपको अपने स्तनों के आकार को कम करने के लिए कुछ स्वस्थ और आसान तरीके अपनाने की चेष्टा करनी होगी।

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