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Updated: 17 hours 26 min ago

क्यों रहते हैं हाथ-पैर ठंडे?

Sun, 10/22/2017 - 06:01

सर्दियों के मौसम में हाथ-पैरों का ठंडा होना सामान्य है। यूं भी ठंड का सामना करने की क्षमता हर व्यक्ति की अलग होती है। पर कुछ लोग हल्की-सी ठंड भी बर्दाश्त नहीं कर पाते। उनकी उंगलियां हर समय ठंडी रहती हैं। ऐसा होना कुछ और बातों की ओर भी इशारा करता है, जन्हिें  समझना जरूरी है। इस बारे में बता रही हैं अमृता प्रकाश 

सर्दियों की शुरुआत हो चुकी है। यूं तो इस मौसम में हाथ व पैर ठंडे होना सामान्य बात है, पर कुछ लोग ठंड के प्रति अधिक संवेदनशील होते हैं। ऐसे लोगों में ठंड ही नहीं, गर्मियों में भी तापमान में आयी थोड़ी सी कमी उंगलियों के ठंडे पड़ने का कारण बन जाती है। खासतौर पर महिलाएं इसकी अधिक शिकार होती हैं। 

नोएडा स्थित मेट्रो हॉस्पिटल के वरष्ठि फिजिशियन डॉ. संजय सनाध्या के अनुसार 'हाथ व पैर ठंडे पड़ने या अधिक ठंड लगने के कई कारण हो सकते हैं। कई लोगों में इसके कारण बेहद सामान्य होते हैं, मसलन ठंड सहने की उनकी क्षमता, पानी कम पीना या बीपी कम होना। इसके अलावा यदि लंबाई के अनुपात में वजन काफी कम है तो भी संभव है कि आपको ठंड अधिक लगती हो। वजन अधिक कम होने का मतलब शरीर में वसा की कमी है, जिससे शरीर गर्म नहीं रह पाता। यह इस बात का भी संकेत है कि आप पर्याप्त मात्रा में नहीं खा रहे हैं। ऐसे लोग खान-पान में सुधार करके राहत पा सकते हैं।'

डॉ. संजय के अनुसार, 'इसके कुछ अन्य कारण भी हो सकते हैं। रक्त की आपूर्ति बाधित होने के कारण भी हाथ-पैर ठंडे पड़ने लगते हैं। हाथों का रंग सफेद, बैंगनी, संतरी व नीला पड़ने लगता है। कुछ देर उन्हें गर्माहट देने पर वे फिर से ठीक हो जाते हैं। अधिक ठंडे इलाकों में रहने वालों में यह समस्या अधिक देखने को मिलती है। अधिक तनाव की स्थिति में भी ऐसा होता है।  

 'हृदय रोगों से जूझ रहे लोगों को भी ठंड अधिक लगती है। धमनियां संकुचित होने के कारण हाथ व पैर की उंगलियों तक रक्त का प्रवाह ढंग से नहीं हो पाता। इसके अलावा गठिया के रोग से परेशान लोगों को भी सामान्य से अधिक ठंड लगती है।' 

 मूलचंद मेडसिटी में आयुर्वेद विभाग प्रमुख डॉ. शशि बाला कहती हैं, ' बाहर की ठंडी हवा हमारे फ्लूड सकुर्लेशन को प्रभावित करती है, जिससे हाथ व पैर ठंडे होना सामान्य है। जिन लोगों को ये समस्या अधिक रहती है, उन्हें शुरुआत से खान-पान का ध्यान रखना चाहिए। आयुर्वेद में त्रिकुटि, पिपली चूर्ण और अश्वगंधा के सेवन से अधिक ठंड लगने की परेशानी में राहत मिलती है। खान-पान में गर्म तासीर वाली चीजों का सेवन करना चाहिए, पर इसका मतलब यह नहीं कि आप अधिक मात्रा में चाय व कॉफी पिएं।' 
डॉ. शशिबाला के अनुसार, 'मात्र दस्ताने व जुराबें पहन कर बैठे रहना सही नहीं है। अपनी जीवनशैली को सुधारना भी जरूरी है।  धूम्रपान का सेवन न करें। कैफीनयुक्त चीजों से परहेज करें। अधिक तंग कपड़े व जूते न पहनें। नियमित व्यायाम से भी रक्तसंचार सही रहता है। खासतौर पर प्राणायाम व गहरे श्वास का अभ्यास करना शरीर में ऊर्जा भरता है।'

डॉ. संजय के अनुसार, 'अमूमन लोग हाथ-पैर के ठंडे होने को सामान्य मान कर इसके उपचार पर ध्यान नहीं देते, जबकि ये कुछ अन्य बातों का संकेत भी हो सकता है। '

खान-पान में इन्हें करें शामिल 
आयुर्वेद के अनुसार, सर्दी खान-पान की दृष्टि से सबसे अच्छा मौसम है। कई तरह के मसाले, जड़ी-बूटियां व मौसमी फल-सब्जियां हैं, जन्हिें डाइट में शामिल करना ठंड में राहत देता है।  
लहसुन
एंटीवायरल गुणों से भरपूर लहसुन की कली को कच्चा चबाना फायदेमंद है। 

आंवला
इसमें विटामिन सी और एंटीऑक्सीडेंट्स प्रचुर मात्रा में  होते हंै, जो कोशिकाओं को क्षतग्रिस्त होने से बचाते हैं। पाचन में लाभकारी होने के साथ-साथ  यह शरीर को सभी तरह के पोषण को ग्रहण करने में सक्षम बनाता है।  

शहद
एंटी बैक्टीरियल गुणों से भरपूर है। मौसमी बुखार व संक्रमण को दूर रखने में सहायता मिलती है। शरीर को ऊर्जा देता है। 

ये भी हैं ठंड का कारण 

शरीर में आयरन की कमी 
लाल रक्त कोशिकाओं को पूरे शरीर में ऑक्सीजन पहुंचाने के अलावा शरीर के विभन्नि हस्सिों से ऊष्मा और पोषक तत्वों को लाने-पहुंचाने में आयरन की अहम भूमिका होती है। आयरन की कमी का सीधा मतलब यह है कि शरीर अपने ये सभी काम सुचारू रूप से कर पाने में सफल नहीं हो पाएगा। आयरन की इस कमी के कारण कंपकंपी भी आती है। इसके अलावा आयरन की कमी से थाइरॉएड ग्लैंड का स्राव भी प्रभावित होता है, जो ठंड लगने का एक और कारण है।

शरीर में आयरन की इस कमी को दूर करने में आयरन सप्लीमेंट के साथ डाइट पर ध्यान देना जरूरी है। मीट, अंडा, हरी पत्तेदार सब्जियां और सी-फूड आदि  पदार्थों को डाइट में शामिल करें। 

दवाओं का असर 
कई दवाएं हैं, जिनका लंबे समय तक सेवन धमनियों को संकुचित कर सकता है। इससे रक्त संचार में समस्या आती है और हाथ-पैर ठंडे होने लगते हैं। खासतौर पर केमस्टि की दुकान से बिना डॉक्टरी सलाह के दवा लेते समय इसका ध्यान रखें। 

रक्तसंचार है कमजोर
सामान्य तापमान पर भी हाथ व पैर का बहुत ठंडा रहना रक्त संचार में समस्या का संकेत हो सकता है, जिससे खून सही ढंग से हाथ व पैरों तक नहीं पहुंच पाता। ऐसा धमनियों में किसी तरह की ब्लॉकेज के कारण हो सकता है या फिर जब दिल खून को ठीक तरीके से पंप न कर पा रहा हो। अगर आप धूम्रपान करते हैं तो भी रक्तसंचार से जुड़ी परेशानियां हो सकती हैं। रेनॉड्स बीमारी की वजह से भी ज्यादा ठंड लगती है। इस बीमारी में तापमान में जरा-सी गिरावट पर हाथ और पैर की रक्त वाहिनियां कुछ देर के लिए अपने-आप सिकुड़ जाती हैं। उनके रंग में भी अंतर दिखता है। 
लंबे समय तक हाथ-पैर ठंडे होने की परेशानी को अनदेखा न करें।

रक्तचाप कम होने पर भी हाथ और पैर ठंडे रहते हैं। शरीर में पानी व खून की कमी, पेट की अनियमितता व कुछ दवाओं का असर इसका कारण हो सकता है। 

विटामिन बी12 की कमी
विटामिन बी12 शरीर के तापमान को नियंत्रित रखने के लिए महत्वपूर्ण है। हमारे शरीर में लाल रक्त कोशिकाओं को बनाने का काम विटामिन बी12 ही करता है। इसकी कमी होने पर पूरे शरीर में ऑक्सीजन की पूर्ति नहीं हो पाती। परिणामस्वरूप अधिक ठंड लगती रहती है। 

शरीर में विटामिन बी12 की कमी का मुख्य कारण संतुलित आहार की कमी है। आमतौर पर यह जानवरों से प्राप्त होने वाले खाद्य पदार्थों में अधिक होता है। इसकी कमी को दूर करने के लिए डाइट में मीट, मछली और दूध से बने प्रोडक्ट्स शामिल करें। एक टेस्ट के जरिए शरीर में इसकी कमी को जांचा जा सकता है। 

थाइरॉएड का असर 
जब थाइरॉएड ग्रंथि पर्याप्त मात्रा में थाइरॉएड  हार्मोन का स्राव नहीं करती तो शरीर का मेटाबॉलज्मि धीमा पड़ने लगता है, जिससे शरीर पर्याप्त मात्रा में ऊष्मा उत्पन्न नहीं करता। थाइरॉएड हार्मोन का स्राव कम होने को हाइपोथाइरॉएडज्मि कहते हैं। बालों का तेजी से गिरना, रूखी त्वचा, तेजी से वजन बढ़ना और ज्यादा थकान इसके लक्षण हैं। 

तनाव और बेचैनी 
तनाव की अधिकता पूरे शरीर पर असर डालती है। हाथ और पैर भी इसके असर से बच नहीं पाते। कई बार हाथ-पैर बहुत ठंडे रहते हैं तो कई बार हाथों से अधिक पसीना आता है। लंबे समय तक नींद की कमी के कारण भी पूरा शरीर सामान्य तरीके से काम करना बंद कर देता है। विभन्नि अध्ययनों के मुताबिक नींद की कमी के कारण हमारे मस्तष्कि के उस हस्सिे की कार्यक्षमता कमजोर हो जाती है, जो शरीर के तापमान को नियंत्रित करता है। अपनी नींद के साथ किसी भी तरह का समझौता न करें। सात से आठ घंटे की नींद अवश्य लें।

 

 

Paytm ने धनतेरस तक बेचा 120 करोड़ रुपए का सोना

Sat, 10/21/2017 - 12:17

मोबाइल वॉलेट कंपनी पेटीएम ने करीब छह महीने पहले अपने प्लेटफॉर्म पर यूजर को डिजिटल सोना खरीदने की स्कीम पेश की थी। पेटीएम ने शुक्रवार को ऐलान किया कि कंपनी ने इस धनतेरस तक 120 करोड़ रुपए का सोना बेचा है। कंपनी ने बताया कि धनतेरस को सोना खऱीदना शुभ माना जाता है और इस दिन पेटीएम ग्राहकों की संख्या दस लाख के पार हो गई।

आज कंपनी ने बताया कि धनतेरस के मौके पर सोना खऱीदने में लोगों ने काफी दिलचस्पी दिकाई और सोने की बिक्री में 12 प्रतिशत की तेजी देखी गयी थी। पेटीएम ने अपनी रिपोर्ट में बताया कि पेटीएम पर सोने की 60 प्रतिशत से अधिक मांग छोटे शहरों से थी। तमिलनाडु, महाराष्ट्र, कर्नाटक, आंध्र प्रदेश, झारखंड और पश्चिम बंगाल से अधिकांश मांग आयी।

पेटीएम ने बताया कि लोगों ने छोटी और बड़ी सभी तरह की अमाउंट में सोना खऱीदा। ज्यादातर उपभोक्ताओं ने 500 रुपये तक का सोना खरीदा। कंपनी के वरिष्ठ उपाध्यक्ष नितिन मिश्रा ने कहा, 'सोना हमें धन की जरूरतों का समाधान तैयार करने का बेहद शानदार अवसर देता है और यह विश्वसनीय है। देश के हर कोने के उपभोक्ता इसका इस्तेमाल करते हैं।'

धनतेरस के मौके पर इस कंपनी ने बेचे 3 लाख से अधिक वाहन

Sat, 10/21/2017 - 12:15

दोपहिया वाहन बनाने वाली देश की सबसे बड़ी कंपनी हीरो मोटोकॉर्प ने धनतेरस के शुभ अवसर पर 17 अक्तूबर को रिकॉर्ड तीन लाख वाहनों की बिक्री की।

उसने दावा किया कि वैश्विक स्तर पर एक दिन में बिक्री का यह स्तर हासिल करने वाली वह पहली कंपनी है।

कंपनी के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया, यह त्यौहारी सीजन हीरो मोटोकॉर्प के लिए शानदार रहा है। धनतेरस के दिन तीन लाख से अधिक वाहनों की बिक्री का वैश्विक रिकॉर्ड इस शानदार सीजन के दौरान हासिल हुआ है। उन्होंने कहा कि कंपनी ने सितंबर में साल लाख से अधिक वाहनों की बिक्री की है। यह किसी भी कंपनी की सबसे अधिक मासिक बिक्री है. दूसरी तिमाही में कंपनी ने 20 लाख से अधिक वाहन बेचे हैं।

कंपनी ने हाल ही में अपनी शुरुआत से अब तक 7.5 करोड़ वाहनों की बिक्री का आंकड़ा पार किया है।

 

 

 

रेलवे का आएगा नया टाइमटेबल, नवंबर से 2 घंटे जल्दी पहुंचाएंगी ट्रेनें

Sat, 10/21/2017 - 12:04

भारतीय रेलवे नवंबर महीने से नया टाइमटेबल लाने जा रहा है। नए टाइमटेबल के मुताबिक लंबी दूरी की लगभघ 700 ट्रेनों के यात्रा के समय में 2 घंटे तक की कटौती की गई है। यानी कि अब नवंबर से आपको अपने गंतव्य स्थान पहले से कम समय में पहुंचाएगी। रेलवे बोर्ड को इस मामले में पहले ही रेल मंत्री पीयूष गोयल की तरफ से निर्देश मिल चुके हैं।

रेलवे बोर्ड के अधिकारी के मुताबिक यह देश में ट्रेनों की औसत गति को बढ़ाने के लिए रेलवे ने यह कदम उठाया है। इसके लिए रेलवे ने इनोवेटिव टाइमटेबल लागू करने का फैसला लिया है। इस टाइमटेबल में गंतव्य स्टेशन पर ट्रेनों के पहुंचने और फिर वहां से लौटने के बीच की समय की अवधि को सदुपयोग किया जाएगा। ट्रेनों के रखरखाव के लिए अब 2 से 4 घंटे का समय दिया जाएगा।

अधिकारी ने बताया कि ऐसा करने से लंबी दूरी की कम से कम 700 ट्रेनों के यात्रा के समय में 15 मिनट से लेकर 2 घंटे तक की कमी आएगी। रेलवे ने इसके लिए ट्रेनों का इंटरनल आडिट भी शुरू कर दिया है। वहीं रेलवे ने इसके साथ ही 50 मेल एक्सप्रेस ट्रेनों को सुपरफास्ट एक्सप्रेस में बदलने का भी फैसला किया है।

 

 

 

स्किन कैंसर से नहीं बचा सकते सन्सक्रीन

Sat, 10/21/2017 - 06:02

जब त्वचा कैंसर से खुद को बचाने की बात हो, तो मन में थोड़ा डर होना जरूरी है। शोधकर्ताओं का कहना है कि त्वचा कैंसर के डर और चिंता से ग्रस्त लोग इस बीमारी के उत्पन्न होने की वजहों को जानने और सावधानी बरतने के बजाय त्वचा पर सन्सक्रीन लगाने का विकल्प चुनते हैं।

अमेरिका में यूनिवर्सिटी ऑफ बफ्फेलो में सहायक प्रोफेसर मार्क कीविनेमी ने कहा कि शोध में पता चला कि चिकित्सक लोगों को सन्सक्रीन के इस्तेमाल के लिए प्रोत्साहित करने के दौरान मरीज की भावनाओं को ज्यादा ध्यान में रखना चाहते हैं। शोध के तहत करीब 1,500 लोगों से उनके सन्सक्रीन इस्तेमाल से संबंधित प्रश्न पूछे गए। इन लोगों को व्यक्तिगत रूप से त्वचा के कैंसर का अनुभव नहीं था। प्रतिभागियों से त्वचा कैंसर के खतरे का अनुमान लगाने और इस बारे में उनकी चिंता से संबंधित प्रश्न पूछे गए।

कुल प्रतिभागियों में से 32 प्रतिशत ने कहा कि वह कभी भी सन्सक्रीन का इस्तेमाल नहीं करते जबकि 14 प्रतिशत का जवाब था कि वे हमेशा सन्सक्रीन का इस्तेमाल करते हैं। हर मामले में यह देखा गया कि त्वचा कैंसर को लेकर लोगों की चिंता इस बारे में जानकारियां हासिल करने की इच्छा के बजाय सीधे उनके व्यवहार को प्रभावित करती है और लोगों की चिंता बढ़ने के साथ साथ सन्सक्रीन का इस्तेमाल भी बढ़ता है। यह शोध इसलिए महत्वपूर्ण है, क्योंकि ज्यादातर मामलों में हम सार्वजनिक स्वास्थ्य संचार के क्षेत्र में जो कुछ भी करते हैं, वह जानकारियों और सूचना के विस्तार पर केंद्रित होता है।

Health: सन्सक्रीनकैंसर

माइग्रेन के दर्द से बचाता है ये आहार

Sat, 10/21/2017 - 06:00

आजकल लोगों में माइग्रेन की समस्या बढ़ती जा रही है जिसका मुख्य कारण जीवनशैली में आने वाला बदलाव है। लोगों की खान-पान व रहन सहन की आदतों में बहुत बदलाव आए हैं जो कि सेहत से जुड़ी समस्याओं को पैदा करते हैं। माइग्रेन एक मस्तिष्क विकार माना जाता है।
आमतौर पर लोग माइग्रेन की समस्या के दौरान अपने आहार पर ज्यादा ध्यान नहीं देते हैं जो कि दर्द को और भी बढ़ा सकते हैं। माइग्रेन की समस्या होने पर ज्यादातर लोग दवाओं की मदद लेकर इससे निजात पाना चाहते हैं। लेकिन वे इस बात से अनजान होते हैं कि ये दवाएं स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव डालते हैं। जानें माइग्रेन में किस तरह के आहार का सेवन करना चाहिए।

  • यूं तो हरी पत्तेदार सब्जियां सेहत के लिए काफी फायदेमंद मानी जाती है। लेकिन माइग्रेन के दौरान इनका सेवन जरूर करना चाहिए क्योंकि इनमें मैग्निशियम अधिक होता है जिससे माइग्रेन का दर्द जल्द ठीक हो जाता है। इसके अलावा साबुत अनाज, समुद्री जीव और गेहूं आदि में बहुत मैग्निशियम होता है।
  • माइग्रेन से बचने के लिए मछली का सेवन भी फायदेमंद होता है। इसमें ओमेगा 3 फैटी एसिड और विटामिन पाया जाता है जो कि माइग्रेन का दर्द से जल्द छुटकारा दिलाती है। अगर आप शाकाहारी हैं तो अलसी के बीज का सेवन कर सकते हैं। इसमें भी ओमेगा 3 फैटी एसिड और फाइबर पाया जाता है।
  • वसा रहित दूध या उससे बने प्रोडक्ट्स माइग्रेन को ठीक कर सकते हैं। इसमें विटामिन बी होता है जिसे राइबोफ्लेविन कहते हैं और यह कोशिका को ऊर्जा देती है। यदि सिर में कोशिका को ऊर्जा नहीं मिलेगी तो माइग्रेन दर्द होना शुरु हो जाएगा।
  • कैल्शियम व मैग्निशियम युक्त आहार को अगर साथ में लिया जाए तो इससे माइग्रेन की समस्या से छुटाकारा पाया जा सकता है।
  • ब्रोकली में मैग्निशियम पाया जाता है तो आप ब्रोकली को सब्जी या सूप आदि के साथ ले सकते हैं। ये खाने में अच्छी लगती है।
  • बाजरा में फाइबर, एंटीऑक्सीडेंट और मिनरल पाये जाते हैं। तो ऐसे में माइग्रेन का दर्द होने पर साबुत अनाज से बने भोजन का जरुर सेवन करें।
  • अदरक आयुर्वेद के अनुसार अदरक आपके सिर दर्द को ठीक कर सकता है। भोजन बनाते वक्त उसमें थोड़ा सा अदरक मिला दें और फिर खाएं।
  • खाने के साथ नियमित रुप से लहसुन की दो कलियों का सेवन जरूर करें। यह आपको माइग्रेन की समस्या से बचाता है।  
  • जिन चीजों में प्रोटीन की मात्रा ज्यादा होती है जैसे चिकन, मछली, बीन्स,मटर, दूध, चीज, नट्स और पीनट बटर आदि। इन चीजों में प्रोटीन के साथ विटामिन बी6 भी पाया जाता है।
  • माइग्रेन के दौरान कॉफी या चाय की जगह हर्बल टी पीना काफी लाभकारी है। इसमें मौजूद नैचुरल तत्व जैसे अदरक, तुलसी, कैमोमाइल और पुदीना चिंता से निजात दिलाने और मांसपेशियों को तनावरहित करने में कारगर है।
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Health: माइग्रेनआहार

ट्विटर की बनी नई पॉलिसी में इन यूजर्स का होगा अकाउंट बंद

Fri, 10/20/2017 - 14:20

माइक्रोब्लॉगिंग वेबसाइट ट्विटर ने अपने प्लेटफॉर्म पर हिंसा और यौन उत्पीड़न रोकने के लिए नई योजना बनाई है। ट्विटर के मुख्य कार्यकारी अधिकारी जैक दोरसे ने ऐलान किया है कि ट्विटर की नई पॉलिसी में वायलेंस और हैरेसमेंट से जुड़े पोस्ट शेयर करने या किसी यूजर को हैरेस करने पर उस अकाउंट और यूजर के खिलाफ अधिक आक्रामक कार्रवाई होगी।

 

ट्विटर की सिक्योरिटी पॉलिसी हैड द्वारा सिक्योरिटी काउंसिल के मेंबर्स को लिखे ईमेल में साइट के नई पॉलिसी के बारे में जानकारी सामने आई। ट्विटर के नए नियमों में फ्री स्पीच, हिंसा और यौन उत्पीड़न में रोक को प्रमुखता से रखा गया है। ऐसे में अगर कोई यूजर इस तरह का कंटेंट अपने अकाउंट से पोस्ट करता है, तो उसका अकाउंट बंद कर दिया जाएगा।

ट्विटर ने बुधवार को कहा, 'हम आशा करते हैं कि हमारे दृष्टिकोण और आगामी बदलाव, साथ ही विश्वास और सुरक्षा परिषद के साथ हमारी भागीदारी यह दर्शाता है कि हम अपने नियमों में बदलाव पर विचार कर रहे हैं और जल्द ही हम नए नियम बनाकर उसे लागू करेंगे। हम तत्काल और स्थायी रूप से उस खाते को बंद कर देंगे, जिसकी हम बिना सहमति के नग्नता फैलाने वाले मूल स्त्रोत के रूप में पहचान करेंगे और/या अगर कोई यूजर जानबूझकर किसी को लक्षित कर परेशान करने वाली सामग्री पोस्ट करता हुआ पाया जाए।'

Tags: माइक्रोब्लॉगिंगवेबसाइटट्विटर

आधार नहीं होने पर राशन देने से नहीं कर सकते मना: UIDAI

Fri, 10/20/2017 - 11:29

हाल ही में झारखंड के सिमडेगा जिले में भूख की वजह से 11 साल की बच्ची की हुई दर्दनाक मौत ने सभी को झकझोर कर रख दिया है। ऐसी हृदयविदारक मौत के बारे में जानकार हर कोई हैरान है। वहीं इस घटना के बाद से आधार कार्ड भी लोगों के निशाने पर आ गया है। अब UIDAI की तरफ से इस घटना पर बयान आया है।

यूआईडीएआई की ओर से कहा गया कि परिवार के पास 2013 से ही आधार कार्ड था, उन्होंने ये भी कहा कि आधार न भी हो तो किसी को राशन देने से मना नहीं किया जा सकता। इस बारे में आधार ऐक्ट के सेक्शन 7 में इस बारे में साफ रूप से निर्देशित किया गया है। आपको बता दें कि, बच्ची की भूख से हुई मौत के मामले में सामने आया था कि उसकी मां कोयली देवी के पास बीपीएल कार्ड था लेकिन राशन नहीं मिलता था। उन्होंने आरोप लगाया गया था कि राशन वाले ने आधार लिंक नहीं होने की वजह से उसका कार्ड कैंसिल कर दिया था।

यूआईडीएआई के सीईओ अजय भूषण पांडे ने इस घटना को दुर्भाग्यपूर्ण है। जी न्यूज समाचार पोर्टल ने एक निजी अंग्रेजी वेबसाइट को दिए इंटरव्यू में अजय भूषण पांडे के बयान के आधार पर लिखा है कि, आधार ऐक्ट के सेक्शन 7 में यह कहा गया है कि सुविधा का लाभ आधार के बेसिस पर मिलना चाहिए लेकिन उसमें ये भी साफ किया गया है कि आधार न होने की वजह से किसी को भी योजना का लाभ लेने से वंचित नहीं किया जाएगा।

उन्होंने आगे कहा कि झारखंड सरकार ने इस मामले की जांच के लिए आदेश दे दिया है। उम्मीद है कि जिन लोगों ने आधार होते हुए भी उस परिवार को राशन नहीं दिया, उनकी जिम्मेदारी सुनिश्चित की जाएगी और उनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।

 

 

 

Tags: UIDAIआधार कार्ड

रूस राष्ट्रपति चुनाव: व्लादिमिर पुतिन से भिड़ने के लिए तैयार ये टीवी स्टार, जानिए कौन है ये लेडी

Fri, 10/20/2017 - 11:18

रूस की सत्ता में दो दशक तक राज कर रहे व्लादिमिर पुतिन को अगले राष्ट्रपति चुनाव में एक टीवी शख्सियत से सामाना करना होगा। टीवी स्टार सेनिया सबचक ने पुतिन के खिलाफ राष्ट्रपति चुनाव लड़ने का मन बनाया है। सेनिया ने एक वीडियो के माध्यम से घोषणा करते हुए कहा कि वे अगले साल मार्च में होने वाले राष्ट्रपति चुनाव में पुतिन के खिलाफ खड़ी होगी।

 

रूस की पेरिस हिल्टन नाम से मशहूर 35 वर्षीय सेनिया एक टीवी एंकर, जर्नलिस्ट और एक्टर है। सेनिया सबचक के पिता व्लादिमिर पुतिन के पॉलिटिकल मेंटर भी रह चुके हैं। एक टीवी पर्सनालिटी बनने से पहले सेनिया टीवी रियालिटी शो में भी भाग ले चुकी है। वोग मैगजीन पेरिस हिल्टन का रूसी वर्जन कह चुकी है।

सेनिया सबचक ने अपने इंस्टाग्राम पर एक वीडियो शेयर कर लोगों को जानकारी दे कि वे अगले साल पुतिन के खिलाफ राष्ट्रपति चुनाव लड़ेगी। सेनिया ने कहा, 'सभी के खिलाफ वोट देने का विकल्प होता था। चुनाव हमें गारंटी देता है कि हम किसी एक खिलाफ वोट नहीं डाले। लेकिन अब यह विकल्प हमसे ले लिया गया ताकि आसानी से हमारे वोट को चुरा सके। इसलिए सरकारें लंबे वक्त तक सत्ता में रहती है'।

सेनिया ने आगे कहा, 'मैं 36 साल की हूं और रूस की नागरिक होने के नाते मुझे राष्ट्रपति चुनाव में भाग लेना का अधिकार है। मैंने निर्णय लिया है कि मैं इस अधिकार का प्रयोग करूंगी'। रूस में 35 साल से अधिक कोई भी नागरिक राष्ट्रपति चुनाव में भाग ले सकता है।

सेनिया ने साथ में यह भी कहा कि जब मैं 18 साल की थी और कॉलेज में पढ़ती थी तब पुतिन रूस के राष्ट्रपति बने थे। उस साल जन्मे बच्चे इस बार वोट करेंगे। जरा इस बारे में सोच कर देखिए। व्लादिमिर पुतिन पिछले 17 साल से रूस के राष्ट्रपति है।

हालांकि, अगले साल होने वाले राष्ट्रपति चुनाव में भाग लेने के लिए पुतिन बहुत पहले ही इशारा कर चुके हैं। रूस मीडिया के मुताबिक, पुतिन चौथी बार अपना कार्यकाल संभाल सकते हैं। हालांकि, कुछ उदारवादी लोग पुतिन से नाराज जरूर है, लेकिन इसका कुछ खास असर नहीं दिखाई देगा।

 

 

 

दिवाली पर चीनी सेना को भारतीय जवानों ने खिलाई मिठाई

Fri, 10/20/2017 - 11:15

देशभर में रोशनी का त्योहार दिवाली सेलिब्रेट किया जा रहा है। भारत और चीन के बीच हाल में डोकलाम के मुद्दे पर काफी तनातनी रही और यह अब भी बनी हुई है। भारत चीन के बीच तनावपूर्ण संबंधों के बीच देश के जवानों ने दिवाली के अवसर पर दोस्ती का नजारा पेश किया।

नाथू ला दर्रे पर तैनात आईटीबीपी के जवानों ने चीनी सैनिकों को दिवाली के अवसर पर मिठाई की टोकरी भेंट की और यह संदेश दिया कि तनावों के बीच भी संबंधों को बनाए रखना जरूरी है तभी समाधान निकल सकेंगे।

हाल की तनातनी को भुलाकर चीनी सेना के अधिकारियों ने भी भारतीय जवानों को दिवाली की बधाई दी और मिठाई की भेंट को स्वीकार किया।

 

 

 

सुप्रीम कोर्ट का बैन बेअसर, दिल्ली एनसीआर में जमकर चले पटाखे, खतरनाक स्तर पर प्रदूषण

Fri, 10/20/2017 - 11:08

दिल्ली एनसीआर में 2016 की दिवाली के अगले दिन प्रदूषण खतरनाक स्तर पर पहुंच गया था। पूरी दिल्ली गैस चैंबर में तब्दील हो गई थी, सांस लेने और आंखों में जलन की परेशानी से लोग बेहाल हो गए थे। अस्पतालों में मरीजों की भीड़ बढ़ गई थी लेकिन दिल्लीवासियों ने इससे सबक नहीं लिया। सुप्रीम कोर्ट के पटाखों की बिक्री पर बैन के बावजूद दिल्ली के सभी इलाकों में लोगों ने जमकर पटाखे चलाए जिससे रात 12 बजते-बजते प्रदूषण स्तर फिर से खतरनाक स्तर पर पहुंच गया।

 

सांस लेने लायक नहीं बची दिल्ली की हवा 

फिलहाल दिल्ली के शादीपुर की हवा की गुणवत्ता एयर क्वालिटी इंडेक्स पर 420 मापी गई है जो काफी खतरनाक स्तर पर है। हवा की क्वालिटी इस इंडेक्स पर 100 पार करने पर ही खराब मानी जाती है लेकिन 300 से ऊपर जाने पर यह बहुत ही खतरनाक मानी जाती है। शादीपुर में एयर क्वालिटी इंडेक्स 420 है यानी इस साल भी दिवाली पर दिल्ली की हवा सांस लेने लायक नहीं बची है।

सुप्रीम कोर्ट के बैन के बावजूद चले पटाखे 

सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली एनसीआर में 1 नवंबर 2017 तक पटाखों की बिक्री पर बैन लगाया था। इसके बावजूद पूरी दिल्ली में लोगों के घरों तक पटाखे कैसे पहुंचे, यह बड़ा सवाल है? सूत्रों के मुताबिक, सुप्रीम कोर्ट के बैन के बावजूद दिल्ली पुलिस और दुकानदारों की मिलीभगत से पटाखे बिके। लोगों ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले का सम्मान नहीं किया और न ही प्रदूषण से स्वास्थ्य को होने वाले नुकसान की परवाह की। शाम सात बजे के बाद से ही दिल्ली में पटाखे चलने शुरू हो गए और देर रात तक आतिशबाजी जारी रही।

जहरीली हवा से बचने के लिए पलायन 

2016 में दिवाली के अगले दिन पूरी दिल्ली गैस चैंबर में बदल गई थी। उस बुरे अनुभव को देखते हुए कई परिवार दिवाली से पहले ही आसपास के शहरों में निकल चुके हैं ताकि प्रदूषित हवा से बच सकें। दिवाली को शाम से ही जिस तरह से पटाखे चले, उससे यही अनुमान लगाए जा रहे हैं कि दिल्ली एक बार फिर गैस चैंबर बन सकती है। ट्विटर पर दिल्लीवासी अपनी चिंता जाहिर करते हुए लगातार ट्वीट कर रहे हैं।

दिल्ली फिर से बनी गैस चैंबर! 

ट्विटर पर एक चैनल एंकर ने लिखा कि शाम तक उनको लगा कि सुप्रीम कोर्ट का पटाखों पर लगा बैन असर कर रहा है लेकिन कुछ देर बाद ही दिल्ली का प्रदूषण स्तर बढ़ने लगा। उन्होंने लिखा - दिल्ली फिर से गैस चैंबर है और स्थिति खतरनाक है। ट्विटर यूजर वैभव ने भी लिखा कि दिल्ली गैस चैंबर बन चुकी है और इससे अस्थमा जैसी बीमारियों के खतरे बढ़ गए हैं। अबु तालिब नाम के यूजर ने लिखा कि दिल्ली गैस चैंबर में तब्दील हो रही है। अपने मास्क चढ़ा लें, प्रदूषण स्तर सामान्य से 10-15 प्वाइंट ऊपर है।

 

नुसरत फतेह के द्वारा राग कलावती

Thu, 10/19/2017 - 12:08

Must Watch - Raag Kalaawati - Tan Man - Ustad Nusrat Fateh Ali Khan

 

 

 

 

राग:  कलावती

राग कलावती एक बहुत ही मधुर और सरल राग है। इसके पूर्वांग में रिषभ और मध्यम वर्ज्य होने से अधिक सावधानी की आवश्यकता होती है। यह स्वर संगतियाँ राग कलावती का रूप दर्शाती हैं -

सा ग प ध ; ग प ध ; प ध प सा' ; नि१ ध ध नि१ ध प ; ग प ध ग प ग सा ; ,नि१ ,ध सा

 

थाट: खमाजजाति: औढव - औढव

जानियें, क्या है – संगीत-चिकित्सा

Wed, 10/18/2017 - 16:06

क्या आप जानतें हैं, कि संगीत हमें मनोरंजन और आत्मिक शान्ति के साथ-साथ उत्तम स्वास्थ्य भी प्रदान करता है।
संगीत हम सभी के जीवन का अभिन्न हिस्सा है। चाहे सुनने वाला हो या सुनाने वाला, संगीत सभी के लिए प्रभावकारी है | संगीत एक ऐसी विधा है जो मानव-चित्त पर विशेष और अमिट छाप छोड़ती है। भारतीय शास्त्रीय संगीत को विश्व के अन्य देशों के संगीतों से श्रेष्ठ माना गया है । भारतीय शास्त्रीय संगीत का जन्म वैदिक युग में हुआ । भारतीय शास्त्रीय संगीत की विशेषता राग पद्धति है जो किसी कलाकार की व्यक्तिगत प्रतिभा को सामने लाती है । स्वर तथा ताल किसी न किसी रूप में विश्व के सभी संगीतों में विद्यमान हैं, लेकिन राग पद्धति केवल भारतीय शास्त्रीय संगीत की विशेषता है।
राग का मूल अर्थ ‘रंगना’ है, अर्थात रंग देने की प्रक्रिया । राग मानव-चित्त को अपने रंग में रंग देता है,जिससे मानव चित्त प्रसन्न हो उठता है। भारतीय शास्त्रीय-संगीत शारीरिक और मानसिक रूप से हमें प्रभावित करने के साथ आध्यात्मिक रूप से भी हमें प्रभावित करता है । रोगनिवारण में भी संगीत की महती भूमिका है। आइये अब हम संगीत से जुड़े विभिन्न पक्षों पर चर्चा करतें हैं ।
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* संगीत का हमारे शरीर में स्थित सप्त चक्रों पर प्रभाव-
भारतीय शास्त्रीय संगीत केवल जन मनोरंजन का ही साधन नहीं है, इसका सम्बन्ध प्रकृति व मानव शरीर से भी रहा है । भारत के प्राचीन वेदों में भारतीय संस्कृति व जीवन के तौर-तरीकों का वर्णन किया गया है । उसी में संगीत को सबसे बेहतर माना गया है । भारतीय शास्त्रीय संगीत का मानव स्वास्थ्य पर सकारात्मक प्रभाव पड़ता है । संगीत के सात सुर ‘‘सा,रे,गा,मा,पा,धा,नि’’ का शरीर पर विशेष प्रभाव पड़ता है । वेदों में शरीर के सात चक्रों का वर्णन किया गया है जो मानव शरीर के विभिन्न भागों का संचालन करते हैं । संगीत के सात सुरों का इन सात चक्रों पर विभिन्न प्रभाव पड़ता है । ‘सा’ ‘मूलाधार’, ‘रे’ ‘स्वाधिष्ठान’, ‘गा’ ‘मणिपुर, ‘मा’ ‘अनाहत’, ‘पा’ ‘विशुद्ध’, ‘धा’ आज्ञा’ और ‘नि’ ‘सहस्र’ चक्र को सुचारू रखने में मदद करते हैं ।
वेदों में संगीत को योग माना गया है जिससे मानव शरीर स्वस्थ रहता है । शरीर रचना विज्ञान के अनुसार सभी बीमारियां वात, पित्त व कफ दोषों के कारण होती है । इन दोषों के निवारण में राग विशेष भूमिका निभाते हैं। रागों से आत्मिक सुख की अनुभूति होती है जिसके कारण इसे रोग निवारण में उपयुक्त माना गया है ।
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रागों से चिकित्सा को लेकर कुछ प्रयोग भी हुए हैं । 20वीं सदी में पं. ओंकारनाथ ठाकुर ने राग ‘पूरिया’ के चमत्कारिक गायन से इटली के शासक मुसोलिनी को अनिद्रा रोग से मुक्ति दिलाई थी। राग को अल्जाइमर के इलाज में भी लाभकारी माना गया है। अल्जाइमर रोग भूलने की बीमारी से सम्बन्धित है जो गंभीर अवस्था में रोगी के लिए घातक सिद्ध हो सकता है । प्रसिद्ध न्यूरोलॉजिस्ट डां. आलिवर स्मिथ के अनुसार ‘राग शिवरंजनी’ सुनने से स्मरण शक्ति बढ़ाई जा सकती है। वर्तमान में वैज्ञानिकों और चिकित्सकों ने प्रमाणित किया है कि 80 फीसदी बीमारियां मानसिक कारणों जैसे तनाव, चिंता, अवसाद आदि से होती है और संगीत एक ऐसी विधा है जिससे मानसिक संतुलन बना रहता है। रागों द्वारा चिकित्सा ‘संगीत चिकित्सा’ कहलाती है । आज संगीत चिकित्सा पर शोध हो रहे हैं और इसके सकारात्मक परिणाम निकलकर सामने आए हैं। रागों को सुनने के लिए विशेष समय निर्धारित किए गए हैं। यूं तो संगीत किसी भी समय सुना जा सकता हैं लेकिन स्वस्थ रहने के लिए इसको समयानुसार सुनना चाहिए। आयुर्वेद के अनुसार वात, पित्त और कफ दोष दिन के 24 घंटों के दौरान चक्रीय क्रम में कार्य करते है। सभी राग अलग-अलग मनोवृत्ति से जुड़े हुए है जिसके कारण रागों का स्वास्थ्य पर प्रभाव पड़ता है। समयानुसार रागों को सुनकर रोगों पर नियंत्रण करके विशेष लाभ उठाया जा सकता है।
यहां कुछ रागों के नाम, उनसे ठीक होने वाले रोग व रागों के समय की जानकारी दी जा रही है।
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* राग- हिंडोला> राग से लाभ- उच्च रक्तचाप व गठियां रोग में लाभ, राग का समय- वसंत ऋतु की सुबह, राग की विशेषता- सकारात्मक मनोदशा।
* राग- कल्याणी> राग से लाभ- तनाव व डर को खत्म कर आत्मविश्वास जगाता है, राग का समय- रात्रि का पहला पहर, राग की विशेषता- साहस और प्रेम।
* राग- कांबोजी> राग से लाभ- तनाव व उदासी को खत्म करता है, राग का समय- सुबह व रात्रि का पहला पहर राग की विशेषता- आनंद, आशा और अभिलाषा को बढ़ाता है।
* राग- दीपक> राग से लाभ- एसिडिटी, अपच-पेट संबंधी बीमारियों में कारगर, राग का समय- गर्मियों की संध्या, राग की विशेषता- क्रोध और नकारात्मक भावनाओं को कम करता है।

 

 

 

Article Category: राग

कब्‍ज के उपचार के घरेलू उपाय

Wed, 10/18/2017 - 11:45

अक़सर आपका पेट ठीक तरह से साफ नहीं होता है तो इसका मतलब कब्ज हो सकता है और आपके शरीर में तरल पदार्थ की कमी है। कब्ज के दौरान आप खुद में तरोजाता महसूस नहीं कर पाते। कब्ज का यदि ठीक समय पर इलाज न कराया जाए तो ये एक भयंकर बीमारी का रूप ले सकता है। कब्ज होने पर व्यक्ति को पेट संबंधी दिक्कूते जैसे पेट दर्द होना, ठीक से फ्रेश होने में दिक्कत होना, शरीर का मल पूरी तरह से न निकलना इत्यांदि होती हैं। कब्ज के लिए प्रभावी प्राकृतिक उपचार तो मौजूद है ही साथ ही आयुर्वेदिक उपचार के माध्यम से भी कब्ज को दूर किया जा सकता है। आइए जानें कब्ज के लिए कौन-कौन से आयुर्वेदिक उपचार मौजूद हैं।

अनियमित दिनचर्या और खान-पान के कारण कब्‍ज और पेट गैस की समस्‍या आम बीमारी की तरह हो गई है। कब्‍ज रोगियों में गैस व पेट फूलने की शिकायत भी देखने को मिलती है। लोग कहीं भी और कुछ भी खा लेते हैं। खाने के बाद बैठे रहना, डिनर के बाद तुरंत सो जाना ऐसी आदतें हैं जिनके कारण कब्‍ज की शिकायत शुरू होती है। पेट में गैस बनने की बीमारी ज्‍यादातर बुजुर्गों में देखी जाती है लेकिन यह किसी को भी और किसी भी उम्र में हो सकती है।

आइए हम आपको कब्‍ज से बचने के घरेलू नुस्‍खे के बारे में जानकारी देते हैं;
 

कब्‍ज के उपचार के घरेलू उपाय –

  • सुबह उठने के बाद नींबू के रस को काला नमक मिलाकर पानी के साथ सेवन कीजिए। इससे पेट साफ होगा।
  • 20 ग्राम त्रिफला रात को एक लिटर पानी में भिगोकर रख दीजिए। सुबह उठने के बाद त्रिफला को छानकर उस पानी को पी लीजिए। इससे कुछ ही दिनों में कब्‍ज की शिकायत दूर हो जाएगी।
  • कब्‍ज के लिए शहद बहुत फायदेमंद है। रात को सोने से पहले एक चम्‍मच शहद को एक गिलास पानी के साथ मिलाकर नियमित रूप से पीने से कब्‍ज दूर हो जाता है।
  • हर रोज रात में हर्र को पीसकर बारीक चूर्ण बना लीजिए, इस चूर्ण को कुनकुने पानी के साथ पीजिए। कब्‍ज दूर होगा और पेट में गैस बनना बंद हो जाएगा।
  • रात को सोते वक्‍त अरंडी के तेल को हल्‍के गरम दूध में मिलाकर पीजिए। इससे पेट साफ होगा।
  • इसबगोल की भूसी कब्‍ज के लिए रामबाण दवा है। दूध या पानी के साथ रात में सोते वक्‍त इसबगोल की भूसी लेने से कब्‍ज समाप्‍त होता है।
     
  • पका हुआ अमरूद और पपीता कब्‍ज के लिए बहुत फायदेमंद होते हैं। अमरूद और पपीता को किसी भी समय खाया जा सकता है।
  • किशमिश को पानी में कुछ देर तक डालकर गलाइए, इसके बाद किशमिश को पानी से निकालकर खा लीजिए। इससे कब्‍ज की शिकायत दूर होती है।
  • पालक का रस पीने से कब्‍ज की शिकायत दूर होती है, खाने में भी पालक की सब्‍जी का प्रयोग करना चाहिए।
  • अंजीर के फल को रात भर पानी में डालकर गलाइए, इसके बाद सुबह उठकर इस फल को खाने से कब्‍ज की शिकायत समाप्‍त होती है।
  • मुनक्‍का में कब्‍ज नष्‍ट करने के तत्‍व मौजूद होते हैं। 6-7 मुनक्‍का रोज रात को सोने से पहले खाने से कब्‍ज समाप्‍त होती है।
  • कब्‍ज की समस्‍या से बचने के लिए नियमित रूप से व्‍यायाम और योगा करना चाहिए। गरिष्‍ठ भोजन करने से बचें।

इन नुस्‍खों को प्रयोग करने से पहले अपने चिकित्सक की सलाह अवश्य लें। अपनाने के बाद भी अगर पेट की बीमारी ठीक नही होती तो चिकित्‍सक से संपर्क अवश्‍य कीजिए।

 

व्रत से जुड़ी गलतफहमियां

Wed, 10/18/2017 - 06:04

नवरात्र आते ही चारों ओर उत्सव का माहौल छा जाता है और इसके साथ ही शुरू हो जाता है नौ दिनों के व्रत का सिलसिला। आमतौर पर व्रत के पारंपरिक आहार में बहुत ज्यादा कैलोरी होती है। इससे व्रत के दौरान पाचन संबंधी समस्याएं परेशान करने लगती हैं और व्रत के बाद वजन भी बढ़ जाता है। दरअसल, पुराने समय में लोग ज्यादा शारीरिक श्रम करते थे इसलिए व्रत के दौरान कुट्टू की पकौडिय़ां, सिंघाड़े का हलवा, मखाने की खीर या रबड़ी जैसी चीजें आसानी से हजम हो जाती थीं, पर अब जीवनशैली बदल चुकी है। शहरों में लोग छोटे-छोटे फ्लैट्स में रहते हैं, घरेलू कामकाज को आसान बनाने के लिए वाशिंग मशीन, वैक्यूम क्लीनर और फूड प्रोसेसर जैसे आधुनिक उपकरण मौजूद हैं। छोटी दूरी के लिए भी गाडिय़ों का इस्तेमाल आम है। ऐसी जीवनशैली में अगर खानपान का सही ढंग से खयाल न रखा जाए तो व्रत के दौरान या उसके बाद भी कब्ज, एसिडिटी और नॉजिया जैसी समस्याएं परेशान कर सकती हैं।

व्रत से जुड़ी गलतफहमियां

नवरात्र में ज्यादातर महिलाएं नौ दिनों का व्रत यह सोच कर भी रखती हैं कि इसी बहाने वजन कम हो जाएगा, पर यह मात्र भ्रम है। नवरात्र के व्रत के दौरान ज्यादातर लोगों के खानपान की दिनचर्या नियमित नहीं होती और इस वजह से ओवरईटिंग हो जाती है। नवरात्र में ज्यादातर लोग केवल दो वक्त का ही भोजन करते हैं। दो बार के खाने में ज्यादा गैप होने की वजह से वे ओवरईटिंग कर लेते हैं। इससे शरीर के मेटाबॉलिक रेट में गड़बड़ी हो जाती है। इससे हार्ट अटैक और टाइप-2 डायबिटीज के स्ट्रोक का खतरा बढ़ जाता है। इसके अलावा व्रत के दौरान कुछ लोग नमक छोड़ देते हैं। ऐसा करना ठीक नहीं। इससे लो बीपी की समस्या होने लगती है। इसलिए कम से कम एक वक्त सेंधा नमक का सेवन जरूर करना चाहिए। एसिडिटी की समस्या से बचने के लिए हर दो घंटे के अंतराल पर थोड़ा-थोड़ा खाएं।

इन बातों का रखें ध्यान

-व्रत के दौरान भूख ज्यादा लगती है। इससे राहत पाने के लिए प्रतिदिन सुबह नीबू-पानी में शहद मिलाकर पीएं।

-कब्ज की समस्या से बचने के लिए फाइबर से भरपूर चीजों का सेवन जरूरी है। इसके लिए फ्रूट चाट या मिली-जुली सब्जियों के स्टीम्ड सैलेड का सेवन करें।

-लो फैट मिल्क और दही का सेवन करें।

-आजकल रेस्त्रां में व्रत की थाली के नाम पर कई तरह के स्वादिष्ट व्यंजन आकर्षक ढंग से सर्व किए जाते हैं, पर इसमें बहुत ज्यादा कैलोरी होती है। इसलिए जहां तक संभव हो ऐसे भोजन से दूर रहने की कोशिश करनी चाहिए।

-नवरात्र के दौरान काब्र्स, फैट और प्रोटीन की सही मात्रा लेना आवश्यक है। डाइट में कमी या अत्यधिक भोजन, दोनों ही शरीर के लिए घातक होते हैं। नौ दिनों के व्रत में अगर डाइट कंट्रोल के साथ व्यायाम भी शामिल कर लिया जाए तो वजन कम करना आसान हो जाता है। 45 मिनट की एरोबिक्स और 15 मिनट की स्ट्रेचिंग एक्सरसाइज नवरात्र के दिनों में स्वस्थ रहने के लिए जरूरी है।

-अगर आपको एसिडिटी और सीने में जलन की समस्या है तो लंबे समय तक खाली पेट न रहें। हर घंटे में थोड़ा-थोड़ा जरूर खाएं। मखाना इसके लिए अच्छा विकल्प होता है। ठंडा दूध पिएं।

-डायबिटीज से ग्रस्त लोग साबूदाना, सिंघाडे का आटा, शकरकंद, आलू और अरबी से बचें। फलों में केला और चीकू से दूर रहें। संतरा, मौसमी और अंगूर जैसे सिट्रस फ्रूट्स ले सकते हैं। स्टार्च रहित ग्रिल्ड डिशेज भी ठीक रहते हैं।

-व्रत के दौरान शरीर में पानी की कमी की वजह से अकसर यूरिनरी ट्रैक से जुडी समस्याएं हो जाती हैं। इससे बचने के लिए अधिक मात्रा में लिक्विड डाइट जैसे, लो फैट दही से बनी लस्सी, शहद के साथ मिल्क शेक और छाछ लें। हर एक घंटे के अंतराल पर पानी पिएं। इनसे भरपूर एनर्जी मिलती है और शरीर में फ्लूइड लेवल बरकरार रहता है। दही और फल कूलिंग एजेंट का काम करते हैं।

-पूरी और पकौड़े की जगह कुट्टू की रोटी, फ्राइड की जगह उबले आलू की चाट, खीर की बजाए दही के साथ फ्रूट सैलेड ले सकते हैं। इस बात का हमेशा ध्यान रखें कि व्रत में फ्राइड नहीं, बल्कि हेल्दी फूड की जरूरत होती है।

-कुट्टू के आटे से बना चीला, सांवा के चावल से बनी इडली या पोहा नारियल की चटनी के साथ खाएं।

व्रत के बाद आहार

नौ दिनों के व्रत के बाद अकसर लोगों को पेट में दर्द और बदहजमी जैसी समस्याएं परेशान करने लगती हैं। इसकी प्रमुख वजह है कि नौ दिनों में हमारा पाचन तंत्र सादे और सात्विक आहार के साथ काम करने का आदी हो चुका होता है। ऐसे में जब हम अचानक पूरी, पराठे, दाल-चावल और ज्यादा मिर्च-मसाले वाली सब्जियों का सेवन शुरू करते हैं तो पाचन तंत्र को ऐसा भोजन पचाने के लिए काफी मेहनत करनी पड़ती है। इसी वजह से ज्यादातर लोगों को नवरात्र के बाद पेट में भारीपन महसूस होता है। ऐसी समस्या से बचने के लिए व्रत के उद्यापन के अगले दिन सुबह सबसे पहले दो-तीन ग्लास गुनगुना पानी पीएं। नाश्ते में नमकीन दलिया या ओट्स और एक कप दूध लें। लंच से पहले एक-एक घंटे के अंतराल पर जूस, नीबू-पानी, छाछ या कोई एक फल लें। शाम को मुरमुरे जैसे हल्के स्नैक्स के साथ चाय, डिनर से एक घंटा पहले सूप और खाने में एक कटोरी हरी सब्जी, दाल, दही और सैलेड के साथ एक या दो रोटी लें। इससे आपके पाचन तंत्र को कोई परेशानी नहीं होगी और अगले दो-तीन दिनों में वह आपके रोजाना के सामान्य खानपान के साथ एडजस्ट हो जाएगा

 

किडनी को ख़राब करने वाली है ये आदतें…….

Wed, 10/18/2017 - 06:00

किडनी की बीमारियां

किडनी की बीमारियां एवं किडनी फेल्योर पूरे विश्व एवं भारत में खतरनाक तेजी से बढ़ रहा है। भारत में प्रत्येक 10 में से एक इंसान को किसी ना किसी रूप में क्रोनिक किडनी की बीमारी होने की संभावना होती है। हर साल करीब 1,50,000 लोग किडनी फेल्योर की अंतिम अवस्था के साथ नये मरीज बनकर आते हैं, जिन्हें या तो डायलिसिस या किडनी प्रत्यारोपण की आवश्यकता होगी। कुछ आम आदतें किडनी की सेहत बिगाड़ने के लिए जिम्मेदार होती हैं तो चलिये जानते हैं किडनी को ख़राब करने वाली आदतों के बारे में।

किडनी का महत्व

किडनियां (गुर्दे) हमारे शरीर में ख़ून से विषैले पदार्थों और अनावश्यक पानी को साफ करती हैं, साथ ही सारे टॉक्सिन्स मूत्र के माध्यम से शरीर से बाहर निकालने में मदद करती हैं। यदि किडनी ठीक न हो, तो रक्त शुद्ध नहीं होगा और सेहत खराब हो जाएगी।

पानी कम पीना

पानी कम मात्रा में पीने से किडनियों को नुक़सान हो सकता है। पानी की कमी के चलते किडनी और मूत्रनली में संक्रमण होने का ख़तरा अधिक हो जाता है। जिससे पोषक तत्वों के कण मूत्रनली में पहुंचकर मूत्र की निकासी को बाधित करने लगते हैं। साथ ही किडनी में स्टोन की आशंका भी बढ़ जाती है। इसलिए दिनभर में क म से कम 2 से 3 लीटर पानी पीने की सलाह दी जाती है।

धूम्रपान एवं तम्बाकू सेवन

धूम्रपान एवं तम्बाकू का सेवन से कई गंभीर समस्याएं तो हो ती ही हैं (विशेषकर फेफड़े संबंधी रोग) लेकिन इसके कराण ऐथेरोस्कलेरोसिस रोग भी होता है। जिससे रक्त नलिकाओं में रक्त का बहाव धीमा पड़ जाता है और किडनी में रक्त कम जाने से उसकी कार्यक्षमता घट जाती है। इसलिए धूम्रपान और तंबाकू का सेवन ना करें।

सुबह उठकर पेशाब ना जाना

देखिये रात भर में मूत्राशय पूरी तरह मूत्र से भर जाता है, जिसे सुबह उठते ही खाली करने की ज़रूरत होती है। लेकिन जब आलस की वज़ह से लाग मूत्र नहीं त्यागते और काफी देर तक उसे रोके रहते हैं तो आगे चलकर यह किडनी को भारी नुकसान पहुंचाता है।

नमक का अधिक सेवन

यह सत्य है कि नमक हमारे भोजन के स्वाद को बढाता है, लेकिन अधिक मात्रा में इसका सेवन उल्टा प्रभाव ड़ालता है। हमारे द्वारा भोजन के माध्यम से खाया गया 95 प्रतिशत सोडियम गुर्दों द्वारा मेटाबोलाइज़्ड होता है। इसलिए नमक का अनावश्यक रूप से अधिक मात्रा में सेवन गुर्दों की क्रियाशीलता को बढ़ाकर उनकी शक्ति को क्षीण करता है।

हाई बीपी के इलाज में लापरवाही

उच्च रक्तचाप अर्थात हाई बीपी के इलाज में लापरवाही किडनी समस्या का बड़ा कारण होती है। इसलिए हमेशा उचित समय पर अपना बीपी नापकर नियंत्रित रखें क्योंकि यह क्रोनिक किडनी की बीमारियों के लिये दूसरे नंबर पर आने वाला कारण होता है।

शुगर के इलाज में कोताही करना

मधुमेह के शिकार लगभग तीस प्रतिशत लोगों को किडनी की बीमारी हो ही जाती है और किडनी की बीमारी से ग्रस्त एक तिहाई लोग मधुमेह पीड़ित हो जाते हैं। इससे यह बात तो तय है कि इन दोनों समस्याओं का आपस में ताल्लुक है। इसलिये खून में शक्कर की मात्रा को नियंत्रित रहना आवश्यक होता है। साथ ही खान-पान को भी नियंत्रित रखना चाहिए।

ज्यादा मात्रा में पेनकिलर लेना

डॉक्टर की सलाह के बिना दवाओं की खरीद से बचें। बिना डॉक्टर की सलाह के दुकान से पेनकिलर दवाएं खरीदकर उनका सेवन किडनी के लिये खतरनाक हो सकता है। सामान्य दवाएं जैसे नाम स्टेरराईट एंडी इन्फेलेमेटरी दवाएं (इब्यूप्रोफेन) आदि के नियमित रूप से सेवन करने से वे किडनी को नुकसान पहुंचा कर पूरा तरह खराब भी कर सकती है।

अन्य नुकसानदेह आदतें

किडनी को खराब करने में कुछ अन्य आदतें जैसे, बहुत ज्यादा शराब पीना, पर्याप्त आराम न करना, सॉफ्ट ड्रिंक्स और सोडा ज्यादा लेना, देर तक भूखा रहना या दूषित भोजन करना, हाईपरटेंशन का इलाज ना कराना तथा बहुत ज्यादा मांस खाना भी कुछ ऐसी आदते हैं जिनकी वजह से किडनी को भारी नुकसान पहुंचता है।

राग बागेश्री | पंडित जसराज जी

Tue, 10/17/2017 - 10:47

Feel both the serenity and the energy of dawn with this rendering of Raga Bageshri by the legendary Pandit Jasraj from the Raga by Sunrise collection. Blessed with a soulful and sonorous voice, which traverses masterfully over all four and a half octaves, Jasraj’s vocalizing is characterized by a harmonious blend of the classic and opulent elements projecting traditional music as an intense spiritual expression, at once chaste and yet densely coloured. This gives his music a unique and sublime emotional quality, reaching out to the very soul of the listener. Perfect diction, clarity in sur, and gayaki, command in all aspects of laya and rhythm, depth of composition and an unmistakable interplay between notes and words to evoke the desired mood and emotion, are the hallmark of Panditji’s music. This sensitivity, added to the pure classical approach, has given his singing a lyrical quality, the quintessential of the Mewati tradition of singing. You will feel all his mastery over music as you listen to his interpretation of this morning raga.

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Track: Raga Bageshri

Album: Raga By Moonlight 

Artist(s): Pandit Jasraj 

Vocal/Instrumental: Vocal

Genre: Classical 

Enjoy and stay connected!

 

राग: बागेश्री

नुसरत को सिर्फ़ जावेद अख़्तर ही क्यों पसंद थे?

Tue, 10/17/2017 - 09:44

आज भी नुसरत फ़तेह अली ख़ान की आवाज़ कानों में पड़ती हैं, तो बहुत से लोग मंत्रमुग्ध होकर उनकी गायकी में खो जाते हैं.

उस आवाज़ के अनूठेपन और रूहानियत को चाहकर भी भुलाया नहीं जा सकता है.

उनकी आवाज़़-उनका अंदाज़, उनका हाथों को हिलाना, चेहरे पर संजीदगी का भाव, संगीत का उम्दा प्रयोग.

शब्दों की शानदार रवानगी... उनकी खनक... सब कुछ हमें किसी दूसरी दुनिया में ले जाने पर मजबूर करता है.

जिस नुसरत फ़तेह अली ख़ान को हम जानते हैं, वो आवाज़़ और तान के जादूगर हैं लेकिन बचपन में वो गायकी नहीं बल्कि तबले का अभ्यास किया करते थे.

पाकिस्तान बनने के लगभग साल भर बाद नुसरत का जन्म पंजाब के लायलपुर (मौजूदा फैसलाबाद) में हुआ. वो 13 अक्टूबर 1948 को क़व्वालों के घराने में जन्मे.

मशहूर कव्वाल थे नुसरत के पिता

नुसरत फ़तेह अली ख़ान की चार बहने थीं और दो छोटे भाई थे.

पिता उस्ताद फ़तेह अली ख़ान साहब ख़ुद भी मशहूर क़व्वाल थे. उस्ताद पिता ने नुसरत को पहले तबला सिखाना शुरू किया लेकिन बाद में नुसरत ने गायन को ही अपना मुक़ाम बना लिया.

हालांकि नुसरत परंपरागत तरीक़े से क़व्वाली तो लंबे अरसे से गा रहे थे, मगर उनके लिए तो अभी दुनिया में शोहरत बटोरने की शुरुआत होनी बाक़ी थी.

वो साल था 1985. लंदन में वर्ल्ड ऑफ म्यूज़िक आर्ट एंड डांस फ़ेस्टिवल का आयोजन हुआ.

इसमें उन्होंने पीटर गैब्रिएल के साथ अपना म्यूज़िक दुनिया के सामने रखा. इसके बाद तो चमत्कार हो गया, जिसने भी इसे सुना वो इसका दीवाना बन गया.

ऐसा निराला अंदाज़, दुनिया भर में जो लोग पंजाबी-उर्दू और क़व्वाली नहीं भी समझ पाते थे, वो भी उनकी आवाज़़ और अंदाज़ के दीवाने हो गए.

कमाल का म्यूज़िक सेंस

1988 में जब पीटर गैब्रिएल हॉलीवुड फ़िल्म 'लास्ट टेंपटेशन ऑफ क्राइस्ट' का साउंडट्रैक बना रहे थे तो उन्होंने उस दृश्य के लिए नुसरत के अलाप का इस्तेमाल किया जिसमें ईसा मसीह सूली को लेकर आगे बढ़ते हैं. इस दर्द के लिए शायद नुसरत से बेहतर कोई नहीं हो सकता था.

पीटर गैब्रिएल ने उन्हें ब्रिटेन के स्टूडियो में रिहर्सल के लिए बुलाया लेकिन जब नुसरत ने रिहर्सल शुरू की तो उन्होंने इसे रोक दिया और कहा कि इसकी कोई ज़रूरत ही नहीं है.

पीटर गैब्रिएल कहते हैं कि उनके साथ काम करना शानदार रहा. वो हमेशा से ही बेहद रचनात्मक हैं, वो कब क्या कुछ नया कर देंगे कोई नहीं जानता. उनके पास टाइंमिंग है, सेंस है और म्यूज़िक की बेहतरीन समझ है.

इसके बाद तो नुसरत ने पीटर गैब्रिएल के संग मिलकर दुनिया के सामने पश्चिम और पूरब की जुगलबंदी पेश कर दी.

सुरों के ऐसे तार छिड़े कि क्या ब्रिटेन क्या यूरोप, क्या जापान, क्या अमरीका पूरी दुनिया में नुसरत के प्रशंसकों की बाढ़ सी आ गई.

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क़व्वाली के सरताज

हालांकि दुनिया ने उन्हें देर से पहचाना, पर जब पहचाना तो दुनिया भर में उनके दीवानों की कमी भी नहीं रही. जिन जिन देशों में रॉक-कंसर्ट हुआ नुसरत फ़तेह अली ख़ान ने अपनी क़व्वाली का रंग जमाया, लोग झूम उठे-नाच उठे.

हालांकि नुसरत ने ज़्यादातर गीत ऊर्दू और पंजाबी में गाए, लेकिन उन्होंने फारसी, हिंदी और ब्रजभाषा में भी गीतों को सुर दिए.

पूर्व और पश्चिम के आलौकिक फ्यूजन में भी उन्होंने अपना पंजाबीपन और सूफ़ियाना अंदाज़ नहीं छोड़ा, न ही खुद से कोई छेड़-छाड़ की और फ्यूजन को एक नई परिभाषा दी.

नुसरत खुद कहते थे, "मैंने नई पीढ़ी को देखकर ही प्रयोग किए और अपनी गायकी में पश्चिमी वाद्य यंत्रों का इस्तेमाल किया. जो लोग वेस्टर्न म्यूज़िक को पसंद करते थे उन्हें अगर क्लासिकल सुनाया जाता तो वो पसंद नहीं करते इसलिए शास्त्रीय गायन में पश्चिमी वाद्य यंत्रों का इस्तेमाल किया."

पाकिस्तान के कराची में अबू मोहम्मद क़व्वाल कहते हैं, "क़व्वाली में नुसरत फ़तेह अली ख़ान का कोई सानी नहीं है लेकिन दुनिया भर में उनकी पहचान और उनकी लोकप्रियता की वजह पश्चिमी संगीत के साथ उनका मेल मिलाप रहा."

अबू मोहम्मद बताते हैं कि एक अच्छे क़व्वाल के लिए ठुमरी, दादरा और क्लासिकल की तालीम होना बहुत ज़रूरी है. नुसरत बेहतरीन क़व्वाल थे लेकिन दुनिया में उन्हें फ्यूज़न से ही शानदार कामयाबी मिली.

भारत से रिश्ते

नुसरत के जादू ने सरहदें पार कीं. इस पार भारत में भी उनके गीत और क़व्वालियां सिर चढ़ कर बोलने लगीं.

'मेरा पिया घर आया...', 'पिया रे-पिया रे...', 'सानू एक पल चैन...', 'तेरे बिन...', 'प्यार नहीं करना...', 'साया भी जब साथ छोड़ जाये...', 'साँसों की माला पे...' और न जाने ऐसे कितने गीत और क़व्वालियाँ हैं, जो दुनिया भर का संगीत ख़ुद में समेटे हुए हैं.

अपने पाकिस्तानी अल्बम्स से भारत में धूम मचाने के बाद नुसरत फ़तेह अली ख़ान को जब बॉलीवुड में फ़िल्म का न्योता मिला तो उन्होंने शायर के मामले में अपनी पसंद साफ़ कर दी कि वो काम करेंगें तो सिर्फ़ जावेद अख़्तर साहब के साथ.

दो मुल्कों के दो बड़े फ़नकारों का संगम हुआ और एलबम निकला 'संगम'.

'संगम' का सबसे हिट गीत था 'आफ़रीन आफ़रीन'.

जावेद अख्तर के बोलों को नुसरत फ़तेह अली ख़ान ने इस गीत को ऐसी रवानगी दी है कि गीत ख़त्म होने का बाद भी इसका नशा नहीं टूटता.

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मौसिकी से प्रेम

जावेद अख़्तर बताते हैं, "संगम एलबम पर काम के दौरान तीन चार दिन नुसरत के साथ बिताए, लेकिन उनका फोकस सिर्फ़ काम पर रहा. किसी एक आदमी की बुराई नुसरत के मुंह से नहीं सुनी."

"वो या तो मेरे शेर सुनते थे या फिर अपनी ही मौसिक़ी में ही रमे रहते थे."

नुसरत दुनिया भर में घूमे और अपने संगीत से लोगों का दिल अपने नाम करते रहे.

खाने के बेहद शौक़ीन नुसरत ने जी भरकर खाया और जी भरकर गाया.

सिर्फ़ 48 साल की उम्र में नुसरत फ़तेह अली ख़ान ने जब 16 अगस्त 1997 को इस दुनिया से विदा ली, तो विश्व-संगीत में एक गहरा शोक छा गया.

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जब राहत देते थे सिर्फ अलाप

जिस समय नुसरत फ़तेह अली ख़ान का नाम दुनिया में सिर चढ़ कर बोल रहा था उस समय उनके भतीजे राहत फ़तेह अली ख़ान उनसे गायन की बारीकियां सीख रहे थे.

जब भी नुसरत कहीं भी प्रोग्राम पेश करते तो राहत का काम सिर्फ़ अलाप देना होता था.

राहत फ़तेह अली ख़ान बताते हैं कि स्टेज पर तो उन्हें डाँट पड़ती ही रहती थी. वैसे तो उन्हें ग़ुस्सा नहीं आता था लेकिन अगर कोई ग़ुस्से वाली बात हो तो उन्हें बहुत ग़ुस्सा आता था.

लेकिन उन्होंने कभी किसी संगीतकार या फिर गायक की आलोचना नहीं की.

आज नुसरत फ़तेह अली ख़ान के चाहने वालों की कोई कमी नहीं क्योंकि ..जब ये लम्बी तान ले कर गाते थे तो दुनिया ठहर जाती थी.

Article Category: शख्सियतSource: http://www.bbc.com/hindi/entertainment-41605260

मोटापे से कमज़ोर होती है याददाश्त?

Tue, 10/17/2017 - 08:17

कहते हैं मोटापा सौ बीमारियों की एक बीमारी है. इससे ब्लड प्रेशर की शिकायत हो जाती है, आप चलने-फिरने से लाचार होने लगते हैं. शुगर बढ़ने लगती है.

मोटापा याददाश्त कमज़ोर करता है, शायद ये आपको नहीं पता. यही नहीं अल्ज़ाइमर जैसी बीमारी को भी जन्म देता है.

वैज्ञानिक रिसर्च साबित करती है कि मोटापे और याददाश्त में दो-तरफ़ा रिश्ता होता है. दोनों आपस में एक-दूसरे से जुड़े हुए हैं.

कैंब्रिज यूनिवर्सिटी की प्रोफेसर लूसी चेक ने हाल ही में अपने लैब में एक तजुर्बा किया. इसका नाम था 'ट्रेजर हंट'. सभी प्रतिभागियों को कंप्यूटर की स्क्रीन पर अलग-अलग जगह पर कुछ चीज़ें छिपाने को कहा गया. बाद में उनसे कुछ सवाल पूछे गए. पाया गया कि जिन प्रतिभागियों का बीएमआई (BMI) ज़्यादा था, उनकी याददाश्त ज़्यादा कमज़ोर थी. बीएमआई का मतलब है बॉडी मास इंडेक्स. यानि लंबाई के मुताबिक वज़न का होना.

2010 में अमरीका की बोस्टन यूनिवर्सिटी स्कूल ऑफ मेडिसिन ने भी एक रिसर्च की थी. इसके नतीजे में पाया गया था कि अधेड़ उम्र के ऐसे लोग, जिनके पेट पर चर्बी ज़्यादा थी उनका ज़हन दुबले-पतले अधेड़ उम्र वालों के मुक़ाबले ज़्यादा कमज़ोर था. ऐसा ही तज़ुर्बा जानवरों के साथ भी किया गया था. उनके भी बढ़ते-घटते वज़न और खाने की आदतों पर ध्यान दिया गया. जानवर जितना खाते हैं, वो उतनी ही कैलोरी खर्च भी करते रहते हैं. इससे उनकी याद्दाश्त पर असर नहीं पड़ता. बल्कि वो तेज़ी से नई चीज़ें सीखते हैं.

मोटापा एक पेचीदा मसला है. इसके साथ बहुत सी वजहें जुड़ी हैं. लिहाज़ा ये कह पाना मुश्किल है कि ये हमारे दिमाग़ को कैसे असर करता है. हाल ही में 500 लोगों पर एक स्टडी की गई. इसमें पाया गया कि मोटापे और उम्र में भी आपस में ताल्लुक़ है. अगर अधेड़ उम्र में मोटापा आता है तो दिमाग पर उसका असर ज़्यादा होता है जबकि कम उम्र वालों के मोटापे का उनके दिमाग पर कम असर पड़ता है.

प्रोफेसर लूसी चेक कहती हैं मोटापा आने के साथ ही हाई ब्लड प्रेशर और इंसुलिन की समस्या भी बढ़ जाती है. जिसकी वजह से खाने की आदतों में भी फ़र्क़ पड़ता है. इससे भी दिमाग पर असर पड़ता है. इंसुलिन एक अहम न्यूरोट्रांसमीटर है. इस बात का पुख्ता सबूत हैं कि इसका असर नई चीज़ों सीखने की क्षमता और याद रखने की क़ुव्वत पर भी पड़ता है.

इसके अलावा सूजन का आना भी याद्दाश्त को कमज़ोर करने में एक अहम रोल निभाता है. अमरीका की अरिज़ोना यूनिवर्सिटी के एक मनोवैज्ञानिक ने एक अनोखा तजुर्बा किया. उन्हों ने साल 1998 से लेकर 2013 तक करीब बीस हज़ार लोगों की याद्दाश्त, बीएमआई और सी-रिएक्टिव प्रोटीन के सैंपल लिए.

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इस रिसर्च में भी यही पाया गया कि याद्दाश्त का ताल्लुक़ बॉडी मास इंडेक्स से है. साथ ही इनफ्लेमेटरी प्रोटीन भी बहुत हद तक इस के लिए ज़िम्मेदार हैं. हालांकि सीधे तौर पर इनको ही ज़िम्मदार ठहराना भी सही नहीं है. इन वजहों के साथ भी और भी बहुत से कारक जुड़े हैं जो दिमाग़ के काम पर अपना असर डालते हैं.

हमें भूख तब लगती है जब हमारा दिमाग़ हमें खाना खाने का हुक्म देता है. लेकिन जब दिमाग ही ये बात भूल जाता है कि वो हमें खाना खाने का हुक्म दे चुका है तो बार-बार हमें आदेश देता रहता है. और, हम कुछ ना कुछ खाते रहते हैं. नतीजतन वज़न बढ़ जाता है. सवाल उठता है कि अगर किसी की याद्दाश्त में सुधार आ जाएगा तो क्या वो खाना कम कर देगा?

ब्रिटेन की लिवरपूल यूनिवर्सिटी के मनोविज्ञानिक एरिक रॉबिनसन ने एक तजुर्बा किया. उन्होंने अपने लैब में क़रीब 48 लोगों को खाने पर बुलाया. इन सभी को दो हिस्सों में बांट दिया गया. एक ग्रुप को खाते समय कुछ रिकार्डिंग सुनने को कहा गया, जिसमें खाने का ज़िक्र नहीं था. जबकि दूसरे ग्रुप को जो ऑडियो दिया गया, उसमें उन्हें खाने पर ध्यान देने को कहा गया था. दूसरे दिन इन सभी को हाई-एनर्जी वाला खाना परोसा गया. जिन लोगों ने एक दिन पहले खाने पर ध्यान देने वाली रिकॉर्डिंग को सुनते हुए खाना खाया था, इस बार उन्होंने कम खाना खाया.

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जबकि जिन्होंने दूसरी रिकॉर्डिंग सुनते हुए खाना खाया था उन्होंने इस बार ज़्यादा खाना खाया. तवज्जो और याद्दाश्त दोनों एक दूसरे से अलग हैं, लेकिन एक दूसरे से जुड़े भी हैं. हम अक्सर वो चीज़ें याद नहीं रखते जिन पर हम तवज्जो नहीं देते. इसीलिए मुमकिन है कि जब हमें ये याद रहता है कि हमें खाना खाना है तो हम वक़्त पर खाना खा लेते हैं, और कम खाना खाते हैं.

वहीं अगर हम एक वक़्त ख़ुद को खाने से दूर रखते हैं, तो, दूसरे वक़्त अपने आप ही ये सोच ज़हन में आती है कि एक वक़्त का खाना हम ने नहीं खाया. लिहाज़ा जब खाना मिलता है तो भूख से ज़्यादा खाना खा लेते हैं. रॉबिनसन का कहना है ज़्यादा खाना और याद्दाश्त का कमज़ोर होना एक-दूसरे पर असर डालते हैं. हो सकता है याद्दाश्त कमज़ोर होने की वजह से ही कोई ज़्यादा खाता हो. लिहाज़ा ज़रूरी है कि आप अपने जीने के तौर तरीक़ों को बदलें. अच्छा खाना खाएं और वक़्त पर खाएं.

लोगों की खाने की आदतें बदल सकें. वो क्या खा रहे हैं? कितना खा रहे हैं? कब खा रहे हैं? इसे लेकर लोगों में जागरुकता फैलाने की ज़रूरत है. लोगों का ध्यान इस तरफ़ दिलाना ज़रूरी है. इसके लिए रॉबिन्सन और उनके साथियों ने मिलकर एक स्मार्ट फोन ऐप बनाया है जो लोगों को खाने पर तवज्जो दिलाता है.

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प्रोफेसर लूसी चेक और उनके साथी भी लोगों के रहन-सहन और जिंदगी के रंग ढंग की जानकारी लेने के लिए मोबाइल ऐप का इस्तेमाल कर रही हैं. चेक कहती हैं कई बार मोटापा ख़ानदानी भी होता है. कुछ लोग खाते ज़्यादा हैं और वर्ज़िश नहीं करते, इसलिए मोटे होते हैं, कुछ के मोटापे की वजह इंसुलिन होती है. लेकिन मोटापे का असली मुज़रिम कौन है, रिसर्चर अभी उसकी तलाश कर रहे हैं.

तब तक आप अपने खान-पान और रहन-सहन में थोड़े-बहुत बदलाव के साथ इससे बच सकते हैं. क्योंकि ये आपकी याददाश्त को कमज़ोर करता है.

Health: मोटापायाददाश्तSource: http://www.bbc.com/hindi/vert-fut-378747...

ब्लूटूथ ऑन रखा तो हो सकता है अटैक!

Tue, 10/17/2017 - 06:07

मोबाइल फोन का ब्लूटूथ ऑन रखना ख़तरनाक साबित हो सकता है. सिक्योरिटी कंपनी अर्मिस के शोधकर्ताओं के समूह ने बीते मंगलवार को एक ऐसे मैलवेयर का पता लगाया है जो ब्लूटूथ से जुड़े डिवाइस पर हमला कर सकता है.

यह स्मार्टफोन ही नहीं, बल्कि स्मार्ट टीवी, टैबलेट, लैपटॉप, लाउडस्पीकर और कारों पर भी हमला कर सकता है.

दुनिया में कुल मिलाकर 5.3 अरब डिवाइस हैं जो ब्लूटूथ का इस्तेमाल करते हैं.

 

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इस मैलवेयर का नाम ब्लूबॉर्न है. इसके जरिए हैकर उन डिवाइस को अपने नियंत्रण में ले सकता है जिनका ब्लूटूथ ऑन होगा. इसके जरिए आपके मोबाइल का डाटा आसानी से चोरी किया जा सकता है.

अर्मिस का कहना है, "हमलोगों को लगता है कि ब्लूटूथ डिवाइस से जुड़े कई और ऐसे मैलवेयर हो सकते हैं, जिनकी पहचान की जानी बाकी है."

 

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ये हैं खतरनाक मैलवेयर

ब्लूबगिंग

इसके मैलवेयर के हमले काफी गंभीर हो सकते हैं. ये बग ब्लूटूथ का फायदा उठाकर हमला करता है. ब्लूबॉर्न इसी श्रेणी में आता है.

इसके ज़रिए हमलावर आपके डिवाइस में वायरस भेज कर आपका डेटा चुरा सकते है.

ब्लूबॉर्न को यूजर की सहमति की जरूरत नहीं होती है और वो किसी लिंक पर क्लिक करने को भी नहीं कहता. सिर्फ दस सेकंड में वो किसी एक्टिव ब्लूटूथ डिवाइस को नियंत्रित कर सकता है.

आर्मिस ने एक ऐसा एप्लीकेशन बनाया है जो यह पता लगा सकता है कि आपका डिवाइस सुरक्षित है या नहीं. इस एप्लीकेशन का नाम है 'ब्लूबॉर्न वलनरब्लिटी स्कैनर'. ये ऐप गूगल के ऑनलाइन स्टोर पर उपलब्ध है.

ब्लूजैकिंग

दूसरा खतरा है ब्लूजैकिंग. यह ब्लूटूथ से जुड़े कई डिवाइस को एक साथ स्पैम भेज सकता है.

यह वीकार्ड (पर्सनल इलेक्ट्रॉनिक कार्ड) के जरिए मैसेज भेजता है, जो एक नोट या फिर कॉनटैक्ट नंबर के रूप में होता है. आम तौर पर यह ब्लूटूथ डिवाइस के नाम से स्पैम भेजता है.

ब्लूस्नार्फिंग

यह ब्लूजैकिंग से ज्यादा खत़रनाक है. इसके जरिए सूचनाओं की चोरी होती है. इसका इस्तेमाल मुख्य रूप से फोनबुक और डाटा चुराने के लिए किया जाता है.

इसके जरिए निजी मैसेज और तस्वीर भी चुराए जा सकते हैं. लेकिन इसके लिए हैकर को यूजर से 10 मीटर के दायरे में होना ज़रूरी होता है.

 

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कैसे सुरक्षित रहें
  • माइक्रोसॉफ्ट, गूगल और लिनक्स ने ब्लूबॉर्न से यूजर को बचाने के लिए पैच रिलीज की है, जिसे इंस्टॉल कर लें.
  • आधुनिक उपकरणों में ब्लूटूथ कनेक्टिविटी के लिए कंफर्मेशन कोड ज़रूरी होता है, इसका इस्तेमाल करें.
  • मोड 2 ब्लूटूथ का इस्तेमाल करें, यह ज्यादा सुरक्षित होता है.
  • अपने डिवाइस ब्लूटूथ नाम को हिडेन मोड में ही रखें.
  • इस्तेमाल नहीं किए जाने पर ब्लूटूथ को ऑफ रखें.
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Source: http://www.bbc.com/hindi/science-41316011

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