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Updated: 14 hours 12 min ago

प्रेम और प्रार्थना

Wed, 12/13/2017 - 06:13

प्रेम और प्रार्थना का आनंद उनमें ही है- उनके बाहर नहीं। जो उनके द्वारा उनसे कुछ चाहता है, उसे उनके रहस्य का पता नहीं है। प्रेम में डूब जाना ही प्रेम का फल है। और, प्रार्थना की तन्मयता और आनंद ही उसका पुरस्कार है।
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स्वप्न की उपेक्षा नहीं!

Tue, 12/12/2017 - 05:28

एक गांव गया था। किसी ने पूछा कि आप क्या सिखाते हैं? मैंने कहा, ''मैं स्वप्न सिखाता हूं।'' जो मनुष्य सागर के दूसरे तट के स्वप्न नहीं देखता है, वह कभी इस तट से अपनी नौका को छोड़ने में समर्थ नहीं होगा। स्वप्न ही अनंत सागर में जाने का साहस देते हैं।
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सत्यम्-शिवम्- सुंदरम्

Tue, 12/12/2017 - 05:22

जीवन में सत्य, शिव और सुंदर के थोड़े से बीज बोओ। यह मत सोचना कि बीज थोड़े से हैं, तो उनसे क्या होगा! क्योंकि एक बीज अपने में हजारों बीज छुपाए हुए है। सदा स्मरण रखना कि एक बीज से पूरा उपवन पैदा हो सकता है।
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जीवन- भाव, विचार और कर्म का समग्र जोड़!

Mon, 12/11/2017 - 06:21

जिस प्रभु को पाना है, उसे प्रतिक्षण उठते-बैठते भी यह स्मरण रखना चाहिए कि वह जो कर रहा है, वह कहीं प्रभु को पाने के मार्ग में बाधा तो नहीं बन जाएगा?
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ज्ञान चक्षु

Sun, 12/10/2017 - 07:40

जीवन का पथ अंधकार पूर्ण है। लेकिन स्मरण रहे कि इस अंधकार में दूसरों का प्रकाश काम न आ सकता। प्रकाश अपना ही हो, तो ही साथी है। जो दूसरों के प्रकाश पर विश्वास कर लेते हैं, वे धोखे में पड़ जाते हैं।
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जीवन- मृत्यु से अभय

Sat, 12/09/2017 - 06:12

शरीर को ही जो स्वयं का होना मान लेते हैं, मृत्यु उसे ही भयभीत करती है। स्वयं में थोड़ा ही गहरा प्रवेश, उस भूमि पर खड़ा कर देता है, जहां कि कोई भी मृत्यु नहीं है। उस अमृत-भूमि को जानकर ही जीवन का ज्ञान होता है।
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सत्य की एक बूंद!

Fri, 12/08/2017 - 06:14

सत्य की एक किरण मात्र को खोज लो, फिर वह किरण ही तुम्हें आमूल बदल देगी। जो उसकी एक झलक भी पा लेते हैं, वे फिर अपरिहार्य रूप से एक बड़ी क्रांति से गुजरते हैं।
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केवल परमेश्वर

Thu, 12/07/2017 - 05:12

बहुत संपत्तियां खोजीं, किंतु अंत में उन्हें विपत्ति पाया। फिर, स्वयं में संपत्ति के लिए खोज की। जो पाया वही परमात्मा था। तब जाना कि परमात्मा को खो देना ही विपत्ति और उसे पा लेना ही संपत्ति है।
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Osho: Can the name of an India-born spiritual guru become a European trademark?

Wed, 12/06/2017 - 20:17

Remember the patent and trademark battles that India fought in the United States over basmati and turmeric?

One intense battle of similar vintage that no one outside the Osho community really cared about was over the rights to trademark Osho in the European Union. Can the name of an India-born spiritual guru become a European trademark?

On October 11, the General Court of the European Union in Luxembourg delivered a judgment upholding the ownership of the OSHO trademark by Osho International Foundation (OIF), an organisation under Swiss law, headquartered in Zurich.

शांति की प्राप्ति!

Wed, 12/06/2017 - 06:11

'जीवन में सबसे बड़ा रहस्य सूत्र क्या है?' जब कोई मुझ से यह पूछता है, तो मैं कहता हूं, ''जीते जी मर जाना।''
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क्या तू मनुष्य है!

Wed, 12/06/2017 - 06:09

क्या तुम मनुष्य हो? प्रेम में तुम्हारी जितनी गहराई हो, मनुष्यता में उतनी ही ऊंचाई होगी। और, परिग्रह में जितनी ऊंचाई हो, मनुष्यता में उतनी ही निचाई होगी। प्रेम और परिग्रह जीवन की दो दिशाएं हैं। प्रेम पूर्ण है, तो परिग्रह शून्य हो जाता है। और, जिनके चित्त परिग्रह से घिरे रहते हैं, प्रेम वहां आवास नहीं करता है।
एक साम्राज्ञी ने अपनी मृत्यु उपरांत उसके कब्र के पत्थर पर निम्न पंक्तियां लिखने का आदेश दिया था : ''इस कब्र में अपार धनराशि गड़ी हुई है। जो व्यक्ति अत्यधिक निर्धन और अशक्त हो, वह उसे खोद कर प्राप्त कर सकता है।''
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योग- अस्पर्श भाव!

Tue, 12/05/2017 - 07:40

'मैं जगत में हूं और जगत में नहीं भी हूं' - ऐसा जब कोई अनुभव कर पाता है, तभी जीवन का रहस्य उसे ज्ञात होता है। जगत में दिखाई पड़ना एक बात है, जगत में होना बिलकुल दूसरी। जगत में दिखलाई पड़ना शारीरिक घटना है, जगत में होना आत्मिक दुर्घटना। जब-तक जीवन है, तब तक शरीर जगत में होगा ही। लेकिन, जिसे 'उस' जीवन को जानना हो- जिसका कि कोई अंत नहीं आता है- उसे स्वयं को जगत के बाहर लेना होता है।
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समता ही परमेश्वर!

Tue, 12/05/2017 - 06:08

अंत:करण जब अक्षुब्ध होता है और दृष्टिं सम्यक, तब जिस भाव का उदय होता है, वही भाव परमसत्ता में प्रवेश का द्वार है। जिनका अंत:करण क्षुब्ध है और दृष्टिं असम्यक, वे उतनी ही मात्रा में सत्य से दूर होते हैं। श्री अरविंद का वचन है, 'सम होने याने अनंत हो जाना।' असम होना ही क्षुद्र होना है और सम होते ही विराट को पाने का अधिकार मिल जाता है। Read : समता ही परमेश्वर! about समता ही परमेश्वर!

जीवन को तो जानो!

Mon, 12/04/2017 - 07:40

जीवन क्या है? जीवन के रहस्य में प्रवेश करो। मात्र जी लेने से जीवन चूक जाता है, लेकिन ज्ञात नहीं होता। अपनी शक्तियों को उसे जी लेने में नहीं, ज्ञात करने में भी लगाओ। और, जो उसे ज्ञात कर लेता है, वही वस्तुत: उसे ठीक से जी भी पाता है।
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अपना-अपना आचरण!

Sun, 12/03/2017 - 04:04

स्मरण रहे कि तुम्हारे पास क्या है, उससे नहीं- वरन तुम क्या हो, उससे ही तुम्हारी पहचान है। वही, तुम्हारी संपदा है, वह सब सम्भाल लेता है।
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ओशो गोल्ड मेडलिस्ट हैं ।

Sat, 12/02/2017 - 19:03

मित्रों 
ओशो गोल्ड मेडलिस्ट हैं ।

150000 किताबों का अध्ययन किये है ।
650 किताबें उनके नाम से प्रकाशित है । बोलने पर इतना नियंत्रण था कि जो बोल दिया वही अंतिम है, वही छपता है । उन्होंने उस में कभी सुधार नहीं किया ।

"माफ़ करना" या "मेरा मतलब ये नहीं था "...आदि शब्दों का कभी भी उपयोग नहीं किया , कोई भी व्यक्ति ओशो से वाद -विवाद नही कर सका । पोप ने कभी उनका चैलेंज स्वीकार नहीं किया । ओशो को गालियां बहुत दी गयी, किन्तु अखंड विश्व में कोई भी व्यक्ति उनसे शास्त्रार्थ करने को राजी नहीं हुआ.

OSHO Meditation Camp At Barnala Panja

Sat, 12/02/2017 - 09:59

OSHO Meditation Camp At Barnala Panjab *** Hahahahahaha Full Of Masti  Read : OSHO Meditation Camp At Barnala Panja about OSHO Meditation Camp At Barnala Panja

निर्वाण और ब्रह्म!

Sat, 12/02/2017 - 06:02

जीवन का तनाव और द्वंद्व 'मैं' और 'न-मैं' के विरोध से पैदा होता है। यही मूल चिंता और दुख है। जो इस द्वंद्व को पार कर लेता है, वह प्रभु में प्रविष्ट हो जाता है।
एक युवक ने पूछा, ''परमात्मा को पाने के लिए मैं क्या करूं?'' मैंने कहा, '''मैं' को शून्य कर लो या पूर्ण कर लो।''
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